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Saturday, 12 June 2021

चीकू वृक्ष

जय श्री कृष्ण। आज चीकू वृक्ष के बारे में लेख लायी हु। कृपया पूरा पढ़े। यह लेख वृक्षारोपण के साथ वृक्ष सवंर्धन इस लेख शृखंला का है। 

Image : Outlook Poshan

चीकू के बारेमे:

गोल गोल मीठे मीठे चीकू सभी को पसंद है। और इस चीकू को खाने के अपने अलग फायदे है।    

वृक्षरोपण के लिए उपयुक्त जगह:

चीकू आप आपके घर के आँगन में लगा सकते है। इसके लिए पानी का रिसाव होने वाली झिरझिरी मिटटी लगती है।  

चीकू के वृक्ष का संवर्धन:

चीकू का पौधा जहा लगाना है वह ३ फिट गहरा और ३ फ़ीट चौड़ा गड्ढा खोदकर १५-२० दिन तक धुप लगने के लिए छोड़ना है। फिर उसके बाद १५ किलो जैविक खाद, १ किलो फॉस्फेट, १०० ग्राम बोरोन और उसी जगह की मिट्टी  मिलाकर पौधा लगाकर उस गड्ढे को भरना है। 

पहले साल भर तो भी कमसेकम पौधे के इर्दगिर्द की जगह को खोदकर खुला करते रहना है और घास उखाड़ना है। पौधा लगने के बाद उसे हर रोज पांच लीटर पानी देना है और पंद्रह दिन में एक बार गौमूत्र मिला हुआ पानी देना है।

बरसात में पानी की जरुरत नहीं है। बाकि दिनों में जैसे जरुरत है वैसे पानी देना चाहिए। 

पहले साल १० किलो जैविक खाद देना है और उसके साथ नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम २०० ग्राम, २०० ग्राम और ३०० ग्राम के अनुपात में देना है। फिर हर साल खाद इसी अनुपात में बढ़ना है और छठे साल से ५० किलो जैविक खाद, १ किलो नाइट्रोजन, १ किलो फॉस्फोरस और डेढ़ किलो पोटैशियम देना है हर साल। 

चीकू के पेड़ को छटाई की ज्यादा जरुरत नहीं है। पर बहुत ज्यादा टेढ़ीमेढ़ी टहनिया, सुखी टहनिया काट देना है तने से आधा इंच हिस्सा छोड़कर। छटाई के बाद चुना और मोरचूद की पेस्ट बनाकर लगाने से इन्फेक्शन नहीं होगा। अगर आपके पेड़ बड़े है तो इस पेस्ट को पतला करके इसका छिड़काव दिया जा सकता है। 

यह चीकू के बारे में  जानकारी आप ज्यादा से ज्यादा शेयर करे। 



Friday, 11 June 2021

जामुन वृक्ष

जय श्री कृष्ण। आज जामुन वृक्ष के बारे में लेख लायी हु। कृपया पूरा पढ़े। यह लेख वृक्षारोपण के साथ वृक्ष सवंर्धन इस लेख शृखंला का है। 

Image : Tree World

जामुन के बारेमे:

श्रीमद भागवद के अनुसार जामुन का चिन्ह श्रीकृष्ण के दाये पैर पर अंकित है। महाभारत में द्रौपदी स्वयंवर के समय लग्न मंडप का सुशोभीकरण जामुन के पत्तोसे किया गया था। जामुन की लकड़ी से दरवाजे बनाये जाते है। जामुन का पेड़ सौ साल तक जिन्दा रह सकता है। रेलवे लाइन के जो स्लीपर्स रहते है वे जामुन की लकड़ी से बनते है। जामुन के फल के कई औषधीय उपयोग है।   

वृक्षरोपण के लिए उपयुक्त जगह:

जामुन आप आपके घर के आँगन में लगा सकते है। यह हर तरह की मिट्टीमे लगा सकते है सिर्फ बहोत ज्यादा रेत वाली मिटटी नहीं चलेगी और बहुत ज्यादा पानी पकड़ कर रहने वाली मिटटी भी नहीं चलेगी। 

जामुन के वृक्ष का संवर्धन:

जामुन का पौधा जहा लगाना है वह ३ फिट गहरा और ३ फ़ीट चौड़ा गड्ढा खोदकर १५-२० दिन तक धुप लगने के लिए छोड़ना है। फिर उसके बाद १५ किलो जैविक खाद, १ किलो फॉस्फेट और उसी जगह की मिट्टी  मिलाकर पौधा लगाकर उस गड्ढे को भरना है। 

पहले साल भर तो भी कमसेकम पौधे के इर्दगिर्द की जगह को खोदकर खुला करते रहना है और घास उखाड़ना है। पौधा लगने के बाद उसे हर रोज पांच लीटर पानी देना है और पंद्रह दिन में एक बार गौमूत्र मिला हुआ पानी देना है। जामुन का पेड़ ज्यादा खाद नहीं मांगता है। पर साल भरमे ८ किलो जैविक खाद और आधा किलो एन-पी-के १२-१२-१२ देने से फल पौधा हराभरा रहता है और फल भी मीठे लगते है। बारिश के दिनों में यह पौधा लगाने से अच्छे से जड़ें मजबूत होती है। जैसे जैसे पेड़ बड़ा होता है वैसे वैसे खाद और पानी दोनों की जरुरत कम होती जाती है। 

इस पौधे को छटाई की जरुरत है। अगर आपके पौधे की उचाई २ फ़ीट है तो जमीन से एक फ़ीट की उचाई तक यानि आधी उचाई तक प्रमुख तने के अलावा कोई भी टहनी नहीं रहने देना है। टहनी काटते वक्त आपको तने से आधा इंच टहनी का हिस्सा छोड़कर टहनी काटनी है ताकि इन्फेक्शन न हो। छटाई के बाद चुना और मोरचूद मिलकर पेस्ट लगाने से भी इन्फेक्शन से राहत मिलती है। एक पूरी तरह से बढे हुए पुरे पेड़ को ६-७ मोटी टहनिया रहने  देना है। एक बार पेड़ बड़ा हो गया तो उसकी सुखी टहनिया ही छाटना है। 

यह जामुन के बारे में  जानकारी आप ज्यादा से ज्यादा शेयर करे। 

आमला वृक्ष

जय श्री कृष्ण। आज आमला वृक्ष के बारे में लेख लायी हु। कृपया पूरा पढ़े। यह लेख वृक्षारोपण के साथ वृक्ष सवंर्धन इस लेख शृखंला का है। 

Image : Indiamart 

आमला के बारेमे:

आमला नवमी के दिन आमला का पूजन होता है। बौद्ध मान्यताओं के हिसाबसे सम्राट अशोक ने आमला फल बौद्ध भिक्षुक संघ को उपहार स्वरुप दिया था। आमला अपने आप में उत्तम औषधी है और इसके कई सारे उपयोग है।  

वृक्षरोपण के लिए उपयुक्त जगह:

आमला आप आपके घर के आँगन में लगा सकते है। यह हर तरह की मिट्टीमे लगा सकते है सिर्फ बहोत ज्यादा रेत वाली मिटटी नहीं चलेगी।  

नीम के वृक्ष का संवर्धन:

आमला का पौधा जहा लगाना है वह ३ फिट गहरा और ३ फ़ीट चौड़ा गड्ढा खोदकर १५-२० दिन तक धुप लगने के लिए छोड़ना है। फिर उसके बाद १५ किलो जैविक खाद, १ किलो फॉस्फेट और उसी जगह की मिट्टी  मिलाकर पौधा लगाकर उस गड्ढे को भरना है। 

पहले साल भर तो भी कमसेकम पौधे के इर्दगिर्द की जगह को खोदकर खुला करते रहना है और घास उखाड़ना है। पौधा लगने के बाद उसे हर रोज पांच लीटर पानी देना है और पंद्रह दिन में एक बार गौमूत्र मिला हुआ पानी देना है। साल भर में १० किलो जैविक खाद देनी है। औषधीय वनस्पति है इसीलिए रासायनिक खाद नहीं देनी है। किसीभी इन्फेक्शन में जैविक दवाई जिसमे नीम का तेल या नीम का अर्क मिला हो वह देनी है। गौमूत्र का छिड़काव भी रोग प्रतिकार के लिए उपयुक्त है। बरसात में ज्यादा पानी देने की जरुरत नहीं है। पर जैसे जैसे पौधा बढ़ेगा वैसे वैसे पानी की मात्रा बढ़ानी है। हर साल १० किलो खाद की मात्रा बढ़ानी है और छठे साल से ५० किलो जैविक खाद एक पौधे को देना है पुरे साल भरमे थोड़ा थोड़ा करके। 

इस पौधे को छटाई की जरुरत है। अगर आपके पौधे की उचाई २ फ़ीट है तो जमीन से एक फ़ीट की उचाई तक यानि आधी उचाई तक प्रमुख तने के अलावा कोई भी टहनी नहीं रहने देना है। टहनी काटते वक्त आपको तने से आधा इंच टहनी का हिस्सा छोड़कर टहनी काटनी है ताकि इन्फेक्शन न हो। छटाई के बाद चुना और मोरचूद मिलकर पेस्ट लगाने से भी इन्फेक्शन से राहत मिलती है। एक पूरी तरह से बढे हुए पुरे पेड़ को ६-७ मोटी टहनिया रहने  देना है।  

यह आमला के बारे में  जानकारी आप ज्यादा से ज्यादा शेयर करे। 

नीम वृक्ष

जय श्री कृष्ण। आज नीम वृक्ष के बारे में लेख लायी हु। कृपया पूरा पढ़े। यह लेख वृक्षारोपण के साथ वृक्ष सवंर्धन इस लेख शृखंला का है। 

Image :Discover Neem 

नीम के बारेमे:

नीम को नीमड़ी माता के यानि दुर्गा माता के रूप में पूजा जाता है। नीम को गांव की फार्मेसी भी  कहा गया है और इससे कई रोगो का इलाज आयुर्वेद में लिखा गया है। श्रावण और भाद्रपद महीने में नीम के पूजन के विविध त्यौहार पुरे भारत में मनाये जाते है। खेती में नीम का तेल जैविक किटकनाशक के रूप में इस्तेमाल में आता है। 

वृक्षरोपण के लिए उपयुक्त जगह:

पानीका रिसाव होने वाली मिटटी चाहिए। इसकी जड़ें बहोत दूर तक फैलती है इसीलिए इसे खुली जगह में लगाना ठीक होता है ताकि यह अच्छेसे फ़ैल सके। 

नीम के वृक्ष का संवर्धन:

पौधा जमीन में लगाने के पहले उस गड्डे में १०० ग्राम बोरोन दाल दीजिये और फिर पौधा लगा दीजिये। एक गिलास गौमूत्र और ५ लीटर पानी दाल दीजिये। यह याद रखना है की जमीन ज्यादा देर गीली नही रहनी चाहिए इसीलिए पानी उस हिसाबसे डाले। ज्यादा देर तक अगर जमीन गीली रही तो जड़ें सड़ना शुरू हो जाती है। पहले एक साल तक १० किलो जैविक खाद और आधा किलो एन-पी-के १२-१२-१२ आपको थोड़ा थोडा करके हर महीने देना है। इससे पौधा अच्छी अपनी जड़ें मजबूत करेंगा। पंद्रह दिनों में एकबार गौमूत्र मिलाया हुआ पानी जरूर देना चाहिए। 

आप जो भी पौधा लगाए आपको उसके इर्दगिर्द उगने वाली घास को निकालना है। थोड़ा मिटटी को खोदकर खुला करना है। और खाद देते समय तने से कमसे कम आठ इंच की दूरिसे गोलाकार खाद देकर पानी डालना है। 

जैसे जैसे नीम का पेड़ बढ़ता है वैसे वैसे उसकी खाद और पानी की जरुरत कम होती है पर खाद देते रहने से वो हरा भरा रहता है और जरुरत के हिसाब से पानी देते रहना चाहिए। 

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बेल वृक्ष

 जय श्री कृष्ण। आज बेल वृक्ष के बारे में लेख लायी हु। कृपया पूरा पढ़े। यह लेख वृक्षारोपण के साथ वृक्ष सवंर्धन इस लेख शृखंला का है। 

Image :Wikipedia 

बेल के बारेमे:

बेल महादेवजी का प्रिय वृक्ष है। ऋग्वेद में ऐसा कह गया है की बेल वृक्ष में लक्ष्मीजी का वास रहता है। तिब्बत में ऐसी मान्यता है की सती माता योग अग्नि में भस्म होने के बाद बेल के वृक्ष के रूप में अवतरित हुई थी। इसीलिए इसे सती माता का रूप माना जाता है और इसीलिए इसके पत्ते महादेवजी को चढ़ाये जाते है। बेल के अनेक औषधीय गुण है और ये खास कर पेट के विकारो पर असरदार है। नेपाल में इसे अखंड सुहाग का प्रतिक माना जाता है। 

वृक्षरोपण के लिए उपयुक्त जगह:

अच्छी रेतीली दोमट मिट्टी, धूप वाली स्थिति, गर्म आर्द्र जलवायु इसके लिए उपयुक्त होती है। अगर बहोत ज्यादा पानी पकड़कर रखने वाली मिटटी है तो इस पेड़ को न लगाए। यह पौधा आप आपके घर के बगीचे में लगा सकते है। 

बेल के वृक्ष का संवर्धन:

बेल का पौधा बरसात में लगाना चाहिए। और लगाने के बाद घास उग आयी हो तो निकालते रहना चाहिए। आसपास की मिटटी को हल्का खोदते रहना चाहिए। 

यह औषधीय गुणों से युक्त पेड़ है इसीलिए इसे रासायनिक खाद और किटकनाशन नहीं देना चाहिए। पहले साल भरमें थोड़ा थोड़ा कर के १० किलो जैविक खाद देना चाहिए। और अगर इन्फेक्शन हो जाये तो जैविक किटकनाशक एवम जैविक दवाइया देनी चाहिए जिसमे नीम का तेल मिला हुआ हो। गौमूत्र का छिड़काव भी रोगमुक्त रखने में सहायक है। शुरुवात के एक साल तक हर होर ५-६ लीटर पानी देना है और हफ्ते में एक बार गौमूत्र मिलाकर पानी देना है। फिर धीरे धीरे पानी की मात्रा आप जरुरत के हीसाबसे कम या ज्यादा कर सकते है। दूसरे साल से हर साल खाद की मात्रा १० किलो से बढ़ानी है और और जब पुरे साल भर में ५० किलो का खाद देना हो जाए यानि छठवे साल से हर साल ५० किलो जैविक खाद देना है। ताकि बेल का पौधा हराभरा रहे और  ज्यादा से ज्यादा फल देवे। 

बेल यह फलो का वृक्ष है इसिलए शुरू के कुछ साल इसकी छटाई करना जरुरी है। आपको । पहले साल भर आपको देखना है की उसे एक से ज्यादा टहनिया कमसे कम जमीन से दो फिट की उचाई तक न रहे। एक प्रमुख टहनी के अलावा आने वाली सारी टहनियाँ आपको काटना है। 

अगर आपके पौधे के कुल उचाई दो फिट है तो जमीन से कमसे कम एक फ़ीट उचाई तक यानि आधी उचाई तक आने वाली सभी टहनियों को आपको काटना है। टहनी को काटते समय यह याद रखे की टहनी आपने पेड़ के तने से आधा इंच दुरी पर काटना है ताकि डिंक्या रोग (फायटोप्थोरा) न हो। कटिंग के बाद जहा कटिंग की है उस जगह पर चुना और मोरचुद का पेस्ट लगाने से पेड़ को इन्फेक्शन नहीं होता है। पर एक बार फल आना शुरू होने के बाद ज्यादा टहनिया नहीं कटनी है। 

यह बेल के बारे में  जानकारी आप ज्यादा से ज्यादा शेयर करे। 

आम

जय श्री कृष्ण। आज आम वृक्ष के बारे में लेख लायी हु। कृपया पूरा पढ़े। यह लेख वृक्षारोपण के साथ वृक्ष सवंर्धन इस लेख शृखंला का है। 

Image : krishisandesh

आम के बारेमे:

आम का फल धूपकाले का फल है। मीठा रसीला आम सभीको पसंद है। आम की लकड़ी यज्ञ में इस्तेमाल होती है।  

वृक्षरोपण के लिए उपयुक्त जगह:

आम का वृक्ष आप आपके घर के आँगन में लगा सकते है। जमीन में पानी का रिसाव अच्छा रहना चाहिए। ज्यादा तर आम का पेड़ ज्यादा रेत वाली जगह पर अच्छे से पनपता है। अगर पानी पकड़ कर रहने वाली मिटटी है तो आप इस पेड़ को नहीं लगा सकते।  

आम के वृक्ष का संवर्धन:

कम ५ फ़ीट गहरा और ७ फिट छोड़ा गड्डा खोद लिया जाये और उसमे २०-२५ किलो जैविक खाद और गार्डन सॉइल मिलाकर कम से कम ४-५ दिन रख देना चाहिए। यह काम मे महीने में करना चाहिए। और फिर उसमे आम का पौधा लगा देना चाहिए। 

शुरू शुरू में बहोत ज्यादा पानी नहीं देना है। और पेड़ के इर्दगिर्द उगने वाली घास निकल देना है। आम फलो का वृक्ष है इसीलिए इसकी छटाई भी करनी पड़ती है। पहले साल भर आपको देखना है की उसे एक से ज्यादा टहनिया कमसे कम जमीन से दो फिट की उचाई तक न रहे। एक प्रमुख टहनी के अलावा आने वाली सारी टहनियाँ आपको काटना है। 

अगर आपके पौधे के कुल उचाई दो फिट है तो जमीन से कमसे कम एक फ़ीट उचाई तक यानि आधी उचाई तक आने वाली सभी टहनियों को आपको काटना है। टहनी को काटते समय यह याद रखे की टहनी आपने पेड़ के तने से आधा इंच दुरी पर काटना है ताकि डिंक्या रोग (फायटोप्थोरा) न हो। कटिंग के बाद जहा कटिंग की है उस जगह पर चुना और मोरचुद का पेस्ट लगाने से पेड़ को इन्फेक्शन नहीं होता है। 

पहले सालभर में आपको आम के पौधे को १० किलो जैविक खाद देना है, २०० ग्राम नाइट्रोजन देना है, २०० ग्राम फॉस्फोरस देना है और ३०० ग्राम पोटैशियम देना है और फिर हर साल १०किलो जैविक खाद, २०० ग्राम नाइट्रोजन २०० ग्राम फॉस्फोरस और ३०० ग्राम पोटैशियम बढ़ाते जाना है  साल का पेड़ होने तक और फिर हर साल भर में ५० किलो जैविक खाद, १ किलो नाइट्रोजन १ किलो फॉस्फोरस और डेढ़ किलो पोटैशियम देना है। यह खाद आपको साल भरमे कम से कम तीन किश्तों में मिलकर देनी है। 

खाद देता समय तने से आठ इंच दुरी पर कमसे कम गोलाकार बनाकर खाद देना है और पानी डालना है। घास निकलते रहना है और जमींन खुली करते रहना है। 

यह आम के बारे में  जानकारी आप ज्यादा से ज्यादा शेयर करे। 

अशोक

 जय श्री कृष्ण। आज अशोक वृक्ष के बारे में लेख लायी हु। कृपया पूरा पढ़े। यह लेख वृक्षारोपण के साथ वृक्ष सवंर्धन इस लेख शृखंला का है। 

Image : Ugaoo 

अशोक के बारेमे:

अशोक वाटिका में रावण की कैद में सीताजी का जिसने शोक हर लिया था वह अशोक वृक्ष है। यह पेड़ सीधा उगता है और लाइन से कई पेड़ पांच पांच फिट की दुरी पर अगर आप लगाएंगे तो आपके बगीचे की सुंदरता बढ़ेगी। यह पेड़ आप आपके घर के बगीचे में लगा सकते है। इसकी पूजा संतान प्राप्ति की लिए की जाती है तथा इसे कामदेव का पेड़ मानते है। आयुर्वेद में इसके कई उपयोग है खास कर महिलाओ के लिए। 

वृक्षरोपण के लिए उपयुक्त जगह:

अशोक का वृक्ष आप आपके घर के आँगन में लगा सकते है। इसकी जड़ें ज्यादा नहीं फैलती। जमीन में पानी का रिसाव अच्छा रहना चाहिए। अगर पानी पकड़ कर रहने वाली मिटटी है तो आप रेत मिला कर भी पेड़ लगा सकते है। 

अशोक के वृक्ष का संवर्धन:

आप जब भी पेड़ लगाए उसके लिए एक गड्डा बनाएंगे और उस गड्डे में पहले जड़ें मजबूत करने वाला खाद डालेंगे। ताकि आपके पेड़ की जड़ें मजबूत हो और वह अच्छे से बढे। पेड़ लगाते समय एक गिलास भरके गौमूत्र दाल दीजिये - यह हुआ जैविक खाद।  

गोमूत्र मिलाया हुआ पानी आपको हफ्ते में कम से कम एक बार देना है और हर रोज पहले एक महीने कम से कम पांच लीटर पानी देना चाहिए। थोड़ा थोड़ा करके सालभरमे १० किलो गोबर खाद या अन्य कोई जैविक खाद दे ताकि पेड़ हरा भरा रहे। खाद पेड़ के तने से कम से कम ८ इंच दुरी पर गोलाकार डालना है और फिर उसपर प्रचुर मात्रा में पानी डालना है।  

आपको जैसी जरुरत है वैसे घास निकालना है और पेड़ के तने के आस पास की मिटटी को खुला करना है। एकबार जड़ें मजबूत हो गयी की पेड़ मजबूत हो जाता है।  

जैसे जैसे पेड़ की उम्र बढ़ेगी वैसे वैसे खाद की मात्रा बढ़ेगी। 

यह औषधीय वृक्ष है और इसीलिए इसे रासायनिक खाद न के बराबर देना है। 

इस पेड़ पर अगर रोग आता है तो नीम तेल युक्त जैविक किटकनाशक का उपयोग करना चाहिए। 

यह हुआ अशोक वृक्ष की पूरी मालूमात। कृपया शेयर करे। 

बरगद

जय श्री कृष्ण। आज बरगद वृक्ष के बारे में लेख लायी हु। कृपया पूरा पढ़े। यह लेख वृक्षारोपण के साथ वृक्ष सवंर्धन इस लेख शृखंला का है। 

Image : 1MG 

बरगद के बारेमे:

बहुवर्षीय विशाल वृक्ष। ब्रम्हा, विष्णु और महेश के त्रिमूर्ति का प्रतिक। यह प्राणवायु प्रचुर मात्रा में देता है वह भी चौबीस घंटे। कई रोगों में लाभदायक औषधिया बरगद से बनती है। बरगद की पूजा वटसावित्री के दिन की जाती है। पर रोज बरगद के पेड़ को पानी देनेसे भी लाभ होता है। यह भारत का राष्ट्रिय वृक्ष है। बरगद का वृक्ष कमसेकम २०० साल जीवित रहता है। मतलब आज आप एक बरगद का पेड़ लगाएंगे और आपकी अगली कम से कम सात पीढ़िया उसकी ताज़ी हवा में सास लेंगी। 

वृक्षरोपण के लिए उपयुक्त जगह:

बरगद के वृक्ष की जड़ें दूर तक फैलती है तथा इसे शाखाओं से निकल कर  हवा में लटकने वाली भी जड़ें होती है। इसीलिए घर के एकदम पास लगाना थोड़ा दिक्कत लाता है। पर आप इसे  किसी खुली जगह पर जहा इसे फ़ैलाने के लिए जगह होंगी - जैसे कोई टीला वहा लगा सकते है। बरगद के पेड़ को ऐसी मिटटी चाहिए जिसमे पानी का रिसाव आसानी से हो जाये पर मिटटी भी बहोत देर तक गीली रहे।

बरगद के वृक्ष का संवर्धन:

आप जब भी पेड़ लगाए उसके लिए एक गड्डा बनाएंगे और उस गड्डे में पहले जड़ें मजबूत करने वाला खाद डालेंगे। ताकि आपके पेड़ की जड़ें मजबूत हो और वह अच्छे से बढे। आप चाहे तो रासायनिक (केमिकल) खाद भी दे सकते या जैविक (आर्गेनिक) खाद भी दे सकते है। पेड़ लगाते समय एक गिलास भरके गौमूत्र दाल दीजिये - यह हुआ जैविक खाद। या फिर आप बोरोन युक्त रासायनिक खाद भी दे सकते है। पेड़ लगाते समय आपको १०० ग्राम बोरोन उस गड्डे में डालकर पेड़ लगाना है। ये सभी पेड़ो के लिए है। 

पेड़ लगाने के बाद एक महीने तक आपको हर रोज पांच लीटर पानी देना चाहिए जिसमे थोड़ा गौमूत्र मिलाएंगे (हफ्ते में एक बार) तो जड़ें मजबूत रहेंगी और वह अच्छे से बढ़ेगा। उसके बाद आपको पानी की मात्रा भी बढ़ानी होंगी। और फिर उसमें गौमूत्र आप पंद्रह दिन में एक बार देंगे तो भी चलेगा। गौमूत्र और गोबर खाद आपको जहा गाय का तबेला है वहा से मिल जायेगा। 

बकरी का खाद भी एक अच्छा विकल्प है पर इसकी एक कमी ये है की कई बार बकरी के खाद में जंगली बबुल के बीज आ जाते है जिससे जंगली बबुल उग आती है। 

और फिर सालभर में आपको दो बार खाद देना चाहिए। पहले एक साल भर में बरगद के पेड़ तो पांच किलो गोबर खाद दिया तो वह अच्छे से बढ़ेगा। यह हो गया जैविक खाद। रासायनिक खाद के लिए आप एनपीके १२-१२-१२ का प्रयोग कर सकते है। आपको ये सालभरमे आधा किलो देना है। आप जो भी खाद दे उसे पेड़ के तनेसे कमसे कम ८ इंच दुरी पर गोलाकार बनाकर दे और खाद देने के पहले मिटटी को थोड़ा खोद ले ताकि वो खुली हो जाये। खाद देने के बाद पानी दाल दे ताकि खाद जल्द से जल्द मिट्टीमे घुल जाये। 

जैसे जैसे पेड़ की उम्र बढ़ेगी वैसे वैसे खाद की मात्रा बढ़ेगी। पर बरगद के पेड़ की खासियत यह है की इसे आप खाद कम भी देंगे तो भी बढ़ेंगा।  

पहले साल भर थोड़ा आपको इस पेड़ की सेवा करनी होंगी। अगर आप ट्री गॉर्ड लगाएंगे तो उसमे निचे से हाथ डालकर  घास निकलने के लिए थोड़ा गैप रखना चाहिए। बरसात के दिनों में जो घास उग आती है उसे उखाड़कर फेकना चाहिए ताकि पेड़ को दिया जाने वाला खाद पेड़ को ही मिले। फिर हर महीने थोड़ी सी मिटटी खोदकर उसे थोड़ा खुला करना चाहिए ताकि जड़े आसानी से बढे। एकबार जड़ें मजबूत हो गयी की पेड़ मजबूत हो जाता है। 

यह पूरी मालूमात बरगद के पेड़ को जमीन में लगाने के लिए है ताकि हम बड़े बरगद के पेड़ का आनंद ले सके और उसकी छाव में बैठ सके। 

पीपल वृक्ष

 जय श्री कृष्ण। आज पीपल वृक्ष के बारे में लेख लायी हु। कृपया पूरा पढ़े। यह लेख वृक्षारोपण के साथ वृक्ष सवंर्धन इस लेख शृखंला का है 


पीपल के बारेमे:

पीपल दीर्घायु होता है और इसकी जड़ें बहुत दूर तक फैलती है। तथा ये जहा लगा रहता है वहा पानी की कमी नहीं होती। पीपल देववृक्ष है तथा इसका सन्दर्भ हिन्दू धर्म के पौराणिक इतिहास में मिलता है। इस अश्वत्थ वृक्ष भी कहा जाता है। गौतम बुद्ध को निर्वाण इसके निचे मिला और भगवतगीता में कृष्णजी ने कहा, "वृक्ष में अश्वत्थ वृक्ष मैं हु।" यह औषधीय गुणधर्म से भरपूर है। यज्ञ के पात्र जिनसे आहुतिया दी जाती है वे पीपल की लकड़ी से बने रहते है। यह प्राणवायु प्रचुर मात्रा में देता है। 

वृक्षरोपण के लिए उपयुक्त जगह:

पीपल के वृक्ष की जड़ें दूर तक फैलती है इसीलिए घर के एकदम पास लगाना थोड़ा दिक्कत लाता है। पर आप इसे घर से थोड़ा दूर लगा सकते है या फिर किसी खुली जगह पर जहा इसे फ़ैलाने के लिए जगह होंगी - जैसे कोई टीला। पीपल के पेड़ को ऐसी मिटटी चाहिए जिसमे पानी का रिसाव आसानी से हो जाये। अगर आप जिस जगह पीपल का पेड़ लगा रहे है वह जगह पर पानी का रिसाव नहीं हो रहा है तो उसे जगह के दो फिट आसपास की जगह में आपको थोड़ी रेत मिट्टीमे मिला कर रखें। यह रेत मिली मिटटी की परत कम से कम दो फिट गहरी होनी चाहिए। 

पीपल वृक्ष का संवर्धन:

आप जब भी पेड़ लगाए उसके लिए एक गड्डा बनाएंगे और उस गड्डे में पहले जड़ें मजबूत करने वाला खाद डालेंगे। ताकि आपके पेड़ की जड़ें मजबूत हो और वह अच्छे से बढे। आप चाहे तो रासायनिक (केमिकल) खाद भी दे सकते या जैविक (आर्गेनिक) खाद भी दे सकते है। पेड़ लगाते समय एक गिलास भरके गौमूत्र दाल दीजिये - यह हुआ जैविक खाद। या फिर आप बोरोन युक्त रासायनिक खाद भी दे सकते है। पेड़ लगाते समय आपको १०० ग्राम बोरोन उस गड्डे में डालकर पेड़ लगाना है। ये सभी पेड़ो के लिए है। 

पेड़ लगाने के बाद एक महीने तक आपको हर रोज पांच लीटर पानी देना चाहिए जिसमे थोड़ा गौमूत्र मिलाएंगे (हफ्ते में एक बार) तो जड़ें मजबूत रहेंगी और वह अच्छे से बढ़ेगा। उसके बाद आपको पानी की मात्रा भी बढ़ानी होंगी। और फिर उसमें गौमूत्र आप पंद्रह दिन में एक बार देंगे तो भी चलेगा। गौमूत्र और गोबर खाद आपको जहा गाय का तबेला है वहा से मिल जायेगा। 

बकरी का खाद भी एक अच्छा विकल्प है पर इसकी एक कमी ये है की कई बार बकरी के खाद में जंगली बबुल के बीज आ जाते है जिससे जंगली बबुल उग आती है। 

और फिर सालभर में आपको दो बार खाद देना चाहिए। पहले एक साल भर में पीपल के पेड़ तो पांच किलो गोबर खाद दिया तो वह अच्छे से बढ़ेगा। यह हो गया जैविक खाद। रासायनिक खाद के लिए आप एनपीके १२-१२-१२ का प्रयोग कर सकते है। आपको ये सालभरमे आधा किलो देना है। आप जो भी खाद दे उसे पेड़ के तनेसे कमसे कम ८ इंच दुरी पर गोलाकार बनाकर दे और खाद देने के पहले मिटटी को थोड़ा खोद ले ताकि वो खुली हो जाये। खाद देने के बाद पानी दाल दे ताकि खाद जल्द से जल्द मिट्टीमे घुल जाये। 

जैसे जैसे पेड़ की उम्र बढ़ेगी वैसे वैसे खाद की मात्रा बढ़ेगी। पर पीपल के पेड़ की खासियत यह है की इसे आप खाद कम भी देंगे तो भी बढ़ेंगा।  

पहले साल भर थोड़ा आपको इस पेड़ की सेवा करनी होंगी। अगर आप ट्री गॉर्ड लगाएंगे तो उसमे निचे से हाथ डालकर  घास निकलने के लिए थोड़ा गैप रखना चाहिए। बरसात के दिनों में जो घास उग आती है उसे उखाड़कर फेकना चाहिए ताकि पेड़ को दिया जाने वाला खाद पेड़ को ही मिले। फिर हर महीने थोड़ी सी मिटटी खोदकर उसे थोड़ा खुला करना चाहिए ताकि जड़े आसानी से बढे। एकबार जेड मजबूत हो गयी की पेड़ मजबूत हो जाता है। 

यह पूरी मालूमात पीपल के पेड़ को जमीन में लगाने के लिए है ताकि हम बड़े पीपल के पेड़ का आनंद ले सके और उसकी छाव में बैठ सके। 

वृक्ष लगाओ एवं वृक्षों का संवर्धन करो

जय श्री कृष्ण सखियों और सखाओं। आज वृक्ष लगाना और उनका संवर्धन करना इस पर लेख लायी हु। पूरा जरूर पढ़े। 

Image : Festivals of India 

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया से मुझे वृक्षारोपण प्रतियोगिताओ के कई मेसेजेस आये जिनमे वृक्षारोपण के साथ वृक्ष सवंर्धन का भी नियम था। हम आज कोरोना के बाद समझ चुके है की वृक्षारोपण करना और उनका संवर्धन करना हमारे लिए कितना जरुरी है। चूंकि हम सभी ऑक्सीजनकी एवं पर्यावरण की महत्ता समझ रहे हैं,  इसीलिए  "पेड़ लगाओ और उनका संवर्धन करो" प्रतियोगिता का आयोजन जगह जगह हो रहा है।

आज वृक्ष लगाना है और एक साल तक उसका संवर्धन करना है और फिर एक साल बाद उस पेड़ के साथ प्रतिभागी को अपना फोटो निकाल कर भेजना है - मतलब पुरे साल भर काम करना है। 

आम, नीम, बेल, जामुन, चिकू, आंवला, पीपल, बरगद, नीम इत्यादि तरह के वृक्ष अगर बहुत सारे लगा दिए जाये तो पर्यावरण की भी सेवा होंगी और कम से कम एक साल के संवर्धन के बाद वह पौधा जो आपने बड़े प्रेमसे लगाया है वो अच्छी देखभाल के कारण जल्दी बड़ा भी होंगा। 

हमने लगाए वृक्ष हमारे वो बच्चे है जिनकी सेवा हमें उनके जीवन के पहले एक साल तक करना है और फिर वही वृक्ष हम और हमारी अगली पीढ़ी को जीवनभर प्राणवायु, छाव, फल, फूल और बहुत कुछ देता रहता है। और वृक्ष चाहे जो भी हो वह हमारे मन का साथी बन जाता है, हमारा दोस्त बन जाता है - हम उससे हमारा सुख दुःख मन ही मन बाट सकते है। 

यही सोचकर यह लेख शृंखला आपके लिए लेकर आयी हु। इन लेखो में किस वृक्ष का संवर्धन कैसे करना है ताकि वह ज्यादा ज्यादा बढे इसका मार्गदर्शन कर रही हु। और निचे कुछ पर्यावरण से जुडी घोषणाएं भी है जिसे आप आपके पेड़ के साथ लगा सकते है। 

वृक्षारोपण से जुडी घोषणाएं:

वृक्ष संवर्धन प्राणवायु का धन। 

वृक्ष का एक अपलोड और लाइक के लिए बादलों का झुण्ड। 

एक वृक्ष जीवन भर का मित्र। 

वृक्ष लगाओ देश बचाओ जीवन बचाओ। 

सास लेने में न होगा कष्ट अगर पेड़ लगाओगे फ़ास्ट। 

वृक्षों के नाम:
भारत के पौराणिक इतिहास और आयुर्वेद में निम्न पेड़ो का बड़ा महत्व है:
पीपल - अश्वत्थ वृक्ष - गौतम बुद्ध को निर्वाण इसके निचे मिला और भगवतगीता में कृष्णजी ने कहा, "वृक्ष में अश्वत्थ वृक्ष मैं हु।" औषधीय गुणधर्म से भरपूर। 
बरगद - बहुवर्षीय विशाल वृक्ष। ब्रम्हा, विष्णु और महेश के त्रिमूर्ति का प्रतिक। 
अशोक - कामदेव का वृक्ष। रामायण में सीताहरण के पश्चात् उन्हें अशोक वाटिका का में रखा गया था। गौतम बुद्ध का जन्म  अशोक वृक्ष के निचे हुआ है। संतान प्राप्ति के लिए पूजा जाता है। 
आम - सबके मन को भाते है और आम की लकड़ी का उपयोग यज्ञ में होता है। 
बेल - महादेवजी के प्रिय पत्र। बेल का मुरब्बा पेट के विकारो पर काम करता है। 
नीम -  दुर्गा माँ का प्रतीक है और नीमड़ी माता ही दुर्गा माता है। त्वचा रोगों की दवाइया बनाता है। 
आमला - आमला नवमी की पूजा की जाती है। शक्तिवर्धक रहता है। 
जामुन - औषधीय गुणधर्म से भरपूर। 
चिकू - औषधीय गुणधर्म से भरपूर।
नारियल - सभी पुजाओ में जरुरी है। नारियल पानी कमजोरी मिटाता है। 
गुग्गल - पूजा में धुप दी जाती है। जनतुनाशक का काम करता है तथा औषधीय गुणों से युक्त। 
चन्दन - चन्दन का श्रृंगार विष्णु के सभी अवतारों को किया जाता है। लेप शरीर को ठंडक देता है। 

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