YouTube

Showing posts with label public awareness. Show all posts
Showing posts with label public awareness. Show all posts

Friday, 26 February 2021

सुविचार

 

१. जो पुरे डूब जाते है, वे संसार का आनंद नहीं ले पाते और संसार को कोसते रहते है|

२. जीवन का सौन्दर्य पकड़ना है तो विपरीत स्थितियों में जीना आना चाहिए|

३. आध्यात्मिक अर्थ है कि मूढ़ वह मनुष्य है, जो जाग सकता है, लेकिन जान बुझकर सोया हुआ है| जानते हुए भी अंजान बना हुआ है|

४. दबाव में रहकर कोई भी काम न किया जाय, क्योकि दबाव लम्बे समय के बाद तनाव का कारण बन जाती है|

५. जीवन अंत का नहीं, संतुलन का कारण होना चाहिए|

६. जीवन का सृजन करना पड़ता है और सृजन दबाव मुक्त होकर ही किया जाता है|

७. संघर्ष हमें थकाता जरुर है पर सुन्दर भी बनाता है|

८. जीवन की सुन्दरता का अर्थ है सफलता के साथ शांति|

९. शिक्षा किताबो से मिलती है, अनुभव जीवन से ही मिल सकता है|

१०. परमात्मा के आलावा कोई हमें गुण प्रदान नहीं कर सकता, वही है जो गुनाहिनों को गुणवान बना सकता है| - गुरुनानक देव|

===============================================================

Saturday, 31 October 2020

मिट्टी वाले दीये


Image result for मिट्टी वाले दीये
Image Credit: www.jagran.com
=======

राष्ट्रहित का गला घोंट कर
छेद न करना थाली में।
मिट्टी वाले दीये जलाना 
अबकी बार दीवाली में।
देश के धन को देश में रखना, 
नहीं बहाना नाली में
मिट्टी वाले दीये जलाना 
अबकी बार दीवाली में।
बने जो अपनी मिट्टी से,
वो दीये बिके बाजारों में,
छिपी है वैज्ञानिकता
अपने सभी तीज-त्योहारों में।
चायनीज झालर से आकर्षित
कीट पतंगे आते हैं,
जबकि दीये में जलकर
बरसाती कीड़े मर जाते हैं।
कार्तिक और अमावस वाली, 
रात न सबकी काली हो।
दीये बनाने वालों की अब 
खुशियों भरी दीवाली हो। 
अपने देश का पैसा जाए, 
अपने भाई की झोली में।
गया जो पैसा दुश्मन देश,
तो लगेगा राइफल की गोली में।
देश की सीमा रहे सुरक्षित
चूक न हो रखवाली में।
मिट्टी वाले दीये जलाना
अबकी बार दीवाली में। 

Monday, 21 September 2020

Machine making for cow dung logs

Image result for Machine making for cow dung logs
Image Credit: mitticool.com


There is a machine for making cow dung logs. If at every cremation ground where dead body is burned, the stray cows who didn’t give milk are kept and the cremation ground is equipped with the same log making machine then it will help all of us as follows.
Very first it will give shelter to stray cows. Anyone who wants to donate ‘Chara’ (grass) can donate here. And the cows will get their respect of ‘Gautama’ in true respect.
As cremation ground authority will have to keep one person to take care of cows and collect cow dung and their urine, believe it or not cow urine has many benefits.
If the cow dung log is installed at cremation place then again they have to give placement to the operator of the machine which can be operated manually also.
If cow is present at funeral place then it can give its dung which can be molded into form of log. These logs can be used instead of wood for funeral. Keeping a cow at funeral can reduce the cost of transportation of the things. Say if it is Gaushala {cow shed} then you have to transport the cow logs from Gaushala to cremation grounds, which have its own cost.
Gaushala can make millions from cow dung logs from the old age cow’s dung. Give respect to the cows and this nature. Instead of wood insist for cow dung logs for funeral.
Thank you for reading share this article for saving nature, subscribe this blog. Comment topics.  
     

Thursday, 17 September 2020

आग की दुर्घटना

यह मैसेज जनसाधारण के लिए है और बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसे कृपया अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य और खासकर बच्चों को अवश्य पढ़ाएं और समझाएं:
कई वर्ष पहले जे. पी. होटल वसंत विहार नई दिल्ली में आग की दुर्घटना हुई, जिसमें बहुत सारे भारतीय मारे गए लेकिन जापानी और अमेरिकन नहीं। जानते हैं क्यों?

Image result for gif आग की दुर्घटना
Image Credit: www.patrika.com

1.  सभी अमेरिकन और जापानी लोगों ने अपने कमरों के दरवाज़ों के नीचे खाली जगहों में गीले तौलिये लगा दिए और खाली जगहों को सील कर दिया, जिससे धुआं उनके कमरों तक नहीं पहुंच सका। या बहुत कम मात्रा में पहुंचा।
2.  इन सभी विदेशी मेहमानों ने अपनी नाक पर गीले रुमाल बांध लिए, जिससे उनके फेफड़ों में धुआं प्रवेश न कर सके।
3.  सभी विदेशी मेहमान अपने अपने कमरों के फर्श पर औंधे लेट गए। (क्योंकि धुआं हमेशा ऊपर की ओर उठता है)
इस प्रकार जब तक अग्निशमन विभाग के कर्मचारी आये, तब तक वे अपने आपको जीवित रख पाने में सफल रहे।
जबकि होटल के भारतीय मेहमानों को इन सुरक्षा उपायों के बारे में पता ही नहीं था इसलिए वे इधर से उधर भागने लगे और उनके फेफड़ों में धुआं भर गया और कुछ समय में ही उनकी मौत हो गई।
अभी कल (24.05.2019) को सूरत (गुजरात) के एक कोचिंग सेंटर में आग की दुर्घटना हुई जिसमें कई बच्चों की जान इस अज्ञानता और भगदड़ के कारण हो गई। यदि उन्हें इन सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी होती तो शायद इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की जान न जाती।
याद रखें, आग लगने की स्थिति में ज़्यादातर मौतें शरीर में धुआं जाने से होती हैं, जबकि आग के कारण कम होती हैं।
क्योंकि आग की स्थिति में हम लोग धैर्य से काम नहीं लेते हैं और इधर से उधर भागने लगते हैं। भागने से हमारी सांसें तेज़ हो जाती हैं जिसके कारण बहुत सारा धुआं हमारे फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है और हम बेहोश हो जाते हैं और ज़मीन पर गिर जाते हैं तथा फिर आग की लपटों से घिर जाते हैं।
इसलिए आग लगने की स्थिति में ये सुरक्षा उपाय अपनाएं:-
1.  भगदड़ न मचाएं और अपने होश कायम रखें ताकि आप दूसरों की मदद कर सकें।
2.  अपने नाक पर गीला रुमाल या गीला लेकिन घना कपड़ा बांधें। तथा फर्श पर लेट जाएं।
3.  यदि आप किसी कमरे में बंद हों तो उसके खिड़की दरवाज़े बंद कर दें तथा उनके नीचे या ऊपर या कहीं से भी धुआं आने की संभावना हो तो उस जगह को भी गीले कपड़े से सील कर दें।
4   अपने आसपास के लोगों से भी ऐसा ही करने को कहें।
5.   अग्निशमन की सहायता की प्रतीक्षा करें। याद रखें, अग्निशमन वाले प्रत्येक कमरे की जांच करते हैं और वे फंसे हुए व्यक्तियों को ढूंढ लेंगे।
6.   यदि आपका मोबाइल काम कर रहा हो तो आप लगातार 100, 101 या 102 पर मदद के लिए कॉल करते रहें। उन्हें आप अपने स्थान की जानकारी भी दें। वे आप तक सबसे पहले पहुंचेंगे।
यह मैसेज लिखने में मुझे 30 मिनेट लगे। आप इस मैसेज को अपने प्रियजनों तक कुछ सेकंड में पहुंचा सकते हैं। 
दुर्घटना में कोई भी फंस सकता है। इसलिए सुरक्षा उपायों की जानकारी सबको अवश्य होनी चाहिए।
फालतू message तो सभी फॉरवर्ड करते रहते हैं। देखता हूँ, इस जानकारी से भरपूर मैसेज को आप कहाँ तक भेजते हैं।
मेरी सलाह है, आपके हर प्रियजनों तक पहुंचना चाहिए।

Tuesday, 1 September 2020

जीवन

वयाच्या ५१ व्या वर्षीही चष्मा नसलेले,
कसल्याही गोळ्या मागे लागल्या नसलेले जीवन जगायचंय ?
मग हे वाचा !
***
एक सत्य सांगतो. जे मला १४ वर्षांपूर्वी प्रसिद्ध हार्ट सर्जन डॉ जगदीश हिरेमठ यांनी सांगितले. (हार्ट attact मुळे icu मध्ये होतो मी, तर डिस्चार्ज देताना त्यांनी जे सांगितले तेच इथे सारांश सांगतोय)
*
ते म्हणाले कि, "मिस्टर धनंजय, एक लक्षात घ्या. जेवण हेच खरे औषध असते. त्यातून योग्य तो आहार आपण निवडून खाल्ला तर तब्येत चांगली राहते. जो ज्याचा सिझन आहे त्याचवेळी त्या भाज्या / फळे खा ! उगीच फ्रोजन मिळतात म्हणून हिवाळ्यात आंबे खाऊ नका !
आणि मुख्य म्हणजे दर दोन अडीच तासांनी थोडं थोडं खा. म्हणजे पोटाला तडस लागत नाही. मशीन हळूहळू छान काम करते. आणि त्याहून महत्वाचे म्हणजे कामामुळे कितीही जागरण होऊ द्या. पण शेवटी गार दूध थोडी साखर टाकून प्या ! त्याशिवाय झोपू नका ! आणि त्याहून सोप्पा अजून एक उपाय म्हणजे दिवसभरात किमान ४ लिटर पाणी पोटात जाऊ द्या ! यामुळे पचनशक्ती उत्तम काम करते. आणि (महिलासाठी खास म्हणजे) त्वचा तजेलदार राहते. सुरकुत्या लवकर पडत नाहीत.
*
मी हे कटाक्षाने पाळतो. कधीही जेवणाची वेळ टाळत नाही. ऑफिसात तर पीए ला तेच एक काम आहे. टेबलवर तर एक तासाने ती पाण्याचा ग्लास आणून ठेवते. २ तासांनी ड्राय फ्रुट / ग्लुकोज बिस्कीट किंवा पावडर अथवा असे कहीतरी देत राहते. दुपारची व रात्रीची जेवणाची वेळ फिक्स आहे. त्यावेळेत अगदी कस्टमर जरी आले तरी त्यांना एकतर "या सोबत चार घास खाऊ" म्हणतो आणि त्यांनी नकार दिला तर त्यांना थांबायला सांगून शांतपणे जेवण करतो. उगीच अशावेळी घाईघाई करत नाही. प्रचंड वर्कलोड मुळे नाईलाजाने जागरण इतकी करतो पण कधीच ऍसिडिटी होत नाही. दर एक दीड तासाने खुर्ची सोडून उठतो. खाली फुटपाथवर पाय मोकळे करून येतो. ग्रीनरी (मीन्स हिरवी झाडे) पहातो. त्यामुळे डोळ्यांना आलेला ताण नाहीसा होतो. म्हणून तर १८ तास पीसीवर काम करू शकतो ! आणि वयाच्या ५१ व्या वर्षी देखील अदयाप चष्मा लागलेला नाही. फोटोत जो दिसतो तो झिरो नंबरचा आहे. गाडीवरून किंवा अन्य कुठे फिरताना डोळ्यात कचरा जाऊ नये म्हणून ती काळजी.
***
डीडी क्लास : मित्रानो आणि मैत्रिणींनो, काहीही करा, पण हे पाळा रे ! महिला वर्ग तर उगीचच त्यागाच्या मोड वर जाऊन स्वतःकडे दुर्लक्ष करतात. घरच्या सगळ्यांनी खाल्ले न मग माझे पोट भरले, असे मानतात. तसे करू नका. तुम्हीच चुकून आजारी पडला तर आणि कितीही प्रेम असले तर तुमच्या ऐवजी तुमचे सलाईन दुसरा कोणी स्वतःला लावून घेणार नाही. हे सत्य आहे. आणि बाई आजारी पडली कि सगळे घर आजारी पडते. हे लक्षात घ्या ! आणि हो एक सांगायचे राहिलेच, दिवसातून एक दोन वेळा तरी मस्त हसा रे ! छान वाटते स्वतःला ! मन आणि डोके शांत होते.
हे जग सुंदर आहे. मग आपले जगणे सुंदर का करू नये ?

Thursday, 9 July 2020

2 का पहाड़ा


यह 2 का पहाड़ा खंडवा जिले की एक स्कूल में शिक्षिका द्वारा पढ़ाया जा रहा है।
दो एकम दो साबुन से हाथ धो
दो दूनी चार सफाई से करो प्यार
दो तिया छः स्वच्छता की जय
दो चौके आठ नाख़ून को काट
दो पंजे दस दांतो में हो ब्रश
दो छंग बारह शौचालय हो प्यारा
दो सत्ते चौदह एक लगाओ पौधा
दो अठ्ठे सोलह साफ रखो शाला
दो नामे अठारह स्वच्छ शहर हमारा
दो धाम बीस डॉक्टर की बचे फीस।
स्वच्छ भारत स्वस्थ्य भारत
==========

Thursday, 7 May 2020

आंख बंद करके एक बार विचार जरूर करें


Image result for think
Image Credit: www.danpontefract.com

एक सहेली ने दूसरी सहेली से पूछा:- बच्चा पैदा होने की खुशी में तुम्हारे पति ने तुम्हें क्या तोहफा दिया ?
सहेली ने कहा - कुछ भी नहीं!
उसने सवाल करते हुए पूछा कि क्या ये अच्छी बात है ? क्या उस की नज़र में तुम्हारी कोई कीमत नहीं ?
लफ्ज़ों का ये ज़हरीला बम गिरा कर वह सहेली दूसरी सहेली को अपनी फिक्र में  छोड़कर चलती बनी।।
थोड़ी देर बाद शाम के वक्त उसका पति घर आया और पत्नी का मुंह लटका हुआ पाया।। फिर दोनों में झगड़ा हुआ।।
एक दूसरे को लानतें भेजी।। मारपीट हुई, और आखिर पति पत्नी में तलाक हो गया।।

जानते हैं प्रॉब्लम की शुरुआत कहां से हुई ? उस फिजूल जुमले से जो उसका हालचाल जानने आई सहेली ने कहा था।।

रवि ने अपने जिगरी दोस्त पवन से पूछा:- तुम कहां काम करते हो?
पवन- फला दुकान में।। रवि- कितनी तनख्वाह देता है मालिक?
पवन-18 हजार।।
 रवि-18000 रुपये बस, तुम्हारी जिंदगी कैसे कटती है इतने पैसों में ?
पवन- (गहरी सांस खींचते हुए)- बस यार क्या बताऊं।।
मीटिंग खत्म हुई, कुछ दिनों के बाद पवन अब अपने काम से बेरूखा हो गया।। और तनख्वाह बढ़ाने की डिमांड कर दी।। जिसे मालिक ने रद्द कर दिया।। पवन ने जॉब छोड़ दी और बेरोजगार हो गया।। पहले उसके पास काम था अब काम नहीं रहा।।

एक साहब ने एक शख्स से कहा जो अपने बेटे से अलग रहता था।। तुम्हारा बेटा तुमसे बहुत कम मिलने आता है।। क्या उसे तुमसे मोहब्बत नहीं रही? बाप ने कहा बेटा ज्यादा व्यस्त रहता है, उसका काम का शेड्यूल बहुत सख्त है।। उसके बीवी बच्चे हैं, उसे बहुत कम वक्त मिलता है।।
पहला आदमी बोला- वाह यह क्या बात हुई, तुमने उसे पाला-पोसा उसकी हर ख्वाहिश पूरी की, अब उसको बुढ़ापे में व्यस्तता की वजह से मिलने का वक्त नहीं मिलता है।। तो यह ना मिलने का बहाना है।।
 इस बातचीत के बाद बाप के दिल में बेटे के प्रति  शंका पैदा हो गई।। बेटा जब भी मिलने आता वो ये ही सोचता रहता कि उसके पास सबके लिए वक्त है सिवाय मेरे।।

याद रखिए जुबान से निकले शब्द दूसरे पर बड़ा गहरा असर डाल देते हैं।। बेशक कुछ लोगों की जुबानों से शैतानी बोल निकलते हैं।।  हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बहुत से सवाल हमें बहुत मासूम लगते हैं।। जैसे-
तुमने यह क्यों नहीं खरीदा।।
तुम्हारे पास यह क्यों नहीं है।।
तुम इस शख्स के साथ पूरी जिंदगी कैसे चल सकती हो।।
तुम उसे कैसे मान सकते हो।। वगैरा वगैरा।।

इस तरह के बेमतलबी फिजूल के सवाल नादानी में या बिना मकसद के हम पूछ बैठते हैं।।
जबकि हम यह भूल जाते हैं कि हमारे ये सवाल सुनने वाले के दिल में नफरत या मोहब्बत का कौन सा बीज बो रहे हैं।।

आज के दौर में हमारे इर्द-गिर्द, समाज या घरों में जो टेंशन टाइट होती जा रही है, उनकी जड़ तक जाया जाए तो अक्सर उसके पीछे किसी और का हाथ होता है।। वो ये नहीं जानते कि नादानी में या जानबूझकर बोले जाने वाले जुमले किसी की ज़िंदगी को तबाह कर सकते हैं।।
ऐसी हवा फैलाने वाले हम ना बनें।।
लोगों के घरों में अंधे बनकर जाओ और वहां से गूंगे बनकर निकलो।।

आंख बंद करके एक बार विचार जरूर करें

Thursday, 30 April 2020

कोरोना

सन २०१९ - २० शायद मनुष्य के लिए एक सीख लेकर आया है। पिछले कई महीनों से पूरी दुनिया एक महामारी से डर के गुजर रही है। और वह तो हर कोई जानता है - कोरोना। इस रोग ने सभी धरती वासियों को आजादी दी है सीवा मनुष्य के। हां हम मनुष्य कोरोना की कैद में है। बाकी हर पेड़ पर फूल आ रहे हैं, फल आ रहे हैं। और दुनिया भर के कीट पतंगे इसमें अपना काम पर आगे खनन का काम बखूबी बेखौफ निभा रहे हैं। पंछी नीले गगन में उड़ रहे हैं और उनकी भी जिंदगी कहीं रुक नहीं रही। घर के किसी बालकनी के कोने में मेरे यहां भी कबूतर ने घौसला बनाया। अपना घर बनाते वक्त उस जोड़ी को किसी भी विषाणु का डर ना था। बढ़िया तिनका तिनका जमा करके लाया करते थे और उन्हें जमाते थे कुछ ही दिन में घोंसला बन गया। अंडे दिए और समय के चलते नहीं जिंदगी या धरती पर आई।
और हम मनुष्य आए दिन कोरोना के डर से आपस में दूरी बना रहे हैं। यह जरूरी भी है क्योंकि कोरोना से बचना ही उसका इलाज है। पिछले 30 दिन से ज्यादा हो गए सभी मानव अपने परिवार के साथ अपने अपने घरों में है। कोई घर के बाहर ऐसे ही नहीं जा रहा। बच्चे भी आंगन में खेल नहीं रहे।
कोई कहता है यह कुछ लोगों की गलती है - अमुक अमुक जानवर काट खाया इसीलिए यह रोग आया। विज्ञान की दृष्टि में यह सच है। फिर सरकारों पर भी आरोप लग रहे हैं । प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। कुछ लोग जैविक महायुद्ध की डरावनी कहानी बना रहे हैं फुल हर मनुष्य एक दूसरे को कटघरे में रखने में व्यस्त हैं। 
पर कोई यह नहीं सोच रहा कि जब गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही थी, और पूरी दुनिया भर के सारे कारखाने चल रहे थे तब प्रदूषण था। पूरा पर्यावरण प्रदूषित था। लेकिन तब भी पेड़ फल फूल रहे थे, कीट पतंगे फूलों का रस पी रहे थे, पंछी खुले आसमान में उड़ रहे थे, मनुष्य अपने कमाई में व्यस्त है और पूरी दुनिया जैसा भी है जीवन जी रही थी।
आज धरती प्रदूषण से मुक्त हो रही है पर विषाणु है - एक अनदेखा अंजाना दुश्मन है। लेकिन फिर भी सारे मनुष्येऎतर जीव इस धरती पर शान से जी रहे हैं। और हम मनुष्य अपने ही घरों में कैद हो गए हैं।
एक अच्छे देश का कानून कैद उसे ही बनाता है जिसने अपराध किया हो। प्रकृति ने आज हमें कैदी बनाया है। इसका मतलब कहीं ना कहीं हम सारे मनुष्य दोषी है।
जो लोग प्रशासन के निर्देशों को अनदेखा करके बाहर घूम रहे हैं वह भी मनुष्य ही है। कोई हॉरर सीरियल के मुख्य पात्र नहीं। बस में प्रकृति के कैद खाने के फरार कैदी है। और कुछ नहीं।
प्रकृति के कहर की यह छोटी सी झांकी है। सिर्फ एक छोटा सा ट्रेलर है। कोरोना ने वैसे जितना डराया उसी हिसाब से जाने कम ली। पर पूरी पिक्चर अभी बाकी है और हमें नहीं पता आगे हमें क्या-क्या देखना है?
पर एक बात याद रखिए यह धरती अगर अपना सीना फाड़ कर हमें पोषित करती है तो यही धरती कंप्लीट होकर कई जाने भी ले सकती है। उसका धन्यवाद कीजिए और उससे प्रेम पूर्वक अपनी जाने अनजानी गलतियों के लिए क्षमा मांग लीजिए। एक दूसरे को कटघरे में खड़े करने के बजाए यह सोचिए कि अगर इससे भयंकर महामारी आई तो तब हम मनुष्य क्या करेंगे?
दुनिया में कई धर्म है। कई संप्रदाय है। और हर किसी धर्म या संप्रदाय में निसर्ग की शक्तियों के आगे नतमस्तक होना सिखाया है। कोई भी ऐसा धर्म नहीं कोई भी ऐसा संप्रदाय नहीं जो कहता है की प्रकृति को नुकसान पहुंचाओ। क्योंकि सभी धर्मों के संस्थापकों को सभी संप्रदायों के संस्थापकों को यह पता था कि अगर धरती उपजाऊ नहीं बची तो खाने के लिए कुछ नहीं बचेगा और अगर भूखे मरेंगे जिंदा ही नहीं रहेंगे तो अपने-अपने धर्म के अनुसार ईश्वर का धन्यवाद कैसे करेंगे? तो आइए हम सब मनुष्य ईश्वर की बनाई इस धरती को अपनी अपनी मान्यताओं के हिसाब से धन्यवाद दे और अपने अपने धार्मिक विचारधारा के तहत धरती से हमारे फैलाएं प्रदूषण के लिए माफी भी मांगे।



अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद। अगर आप मेरी बात से सहमत हैं तो इस लेख को ज्यादा से ज्यादा फैलाए।

Thursday, 2 April 2020

भारतीय सैनिक


20 डिग्री में हमें ठंड लगनें लगती है..
16 डिग्री में हम गर्म कपड़े पहनते हैं..
12 डिग्री में हम मफलर आदी लगाते हैं..
8 डिग्री में हम उसके बाद भी कंपनें लगते हैं.
4/5 डिग्री में रजाई से बाहर नहीं निकलते..
1/2 डिग्री में घरों में अलाव जलनें लगते हैं..
0 डिग्री पर पानीं जम जाता है..
-1/2 डिग्री पर हमारी जबान लड़खड़ानें लगती है..
-5/8 डिग्री पर ...
-10/12 डिग्री पर...
-15/18 डिग्री पर सोचिये...
-20 डिग्री पर सियाचीन में भारतीय सैनिक भारत की सीमाओं की रक्षा करते हैं....पूरी मुस्तैदी के साथ 7-12 किलों की बंदूक और करीब 20 किलो की रसद अपनें कंधों पर उठाये... घुटनें तक बर्फ में -ताकी हम अपनीं स्वतंत्रता का आनंद उठा सकें.....ताकी हम अपनें परिवारों के साथ क्रिकेट मैच का आनंदउठा सकें.....ताकी हमारे बच्चे शांती के साथ स्कूल जा सके.... 

Tuesday, 31 March 2020

पालतू जानवर और धूपकाला 

नमस्ते मेरे प्रिय वाचको ! नामसे ही आपको पता चला होंगा की ये लेख पालतू जानवारोपर है। मै कुछ टिप्स आपके साथ शेयर कर रही हु। अगर आपका कोई पालतू जानवर नहीं है तो कोई बात नहीं फिर भी अंत तक पढ़िए और आपके उन मित्रोंके साथ इसे शेयर जरूर कीजिये जिनके पास उनका प्यारा पालतू प्राणी है। 

छायाचित्र: मैक्स पिक्सेल 

  • कुत्ते को पसीना उसके पंजो से ही आता है। कई प्राणी खासकर कुत्ते हाफकर अपने आप को शीतल रखते है। बढ़ता तापमान उष्मागत तनाव तथा शारीरिक चोट का कारण बन सकता है। कई बार जानवर के दिमाग को चोट लगने से या तनाव से उनकी मृत्यु हो सकती है। इसीलिए अपने प्यारे पालतू जानवर को आप आपके साथ छाव की जगह पर रखे। कई घरोमे पेट हाउस रहता है पर उसकी जगह आपको घनी छाव में रखनी पड़ेगी। ताकी धुप की वजह से होने वाले तनाव से वो दूर रह सके। अगर आपके  हाउस की जगह नहीं  आपके पेट को घर में ही जगह दे। 
  • आप अगर आपकी कार में आपके पेट बाहर ले जा रहे हो तो उन्हें पार्क की हुई कार में न छोड़े। क्युकी बंद कार का तापमान तेजीसे बढ़ सकता है जिससे कार में बैठा आपका प्यारा पालतू जानवर उष्माघात का शिकार होकर मर सकता है। इसीलिए गर्मी के दिनोमे आपके प्यारे को कार में रख कर थोड़ी देर के लिए भी न जाये उसे अपने साथ ले जाये। 
  • आपके घर के आसपास या आपके घर में मिटटी के बर्तन में पानी भर कर रखे। इससे पानी ठंडा रहेगा। आपके घर  रहने वाले पालतू प्राणी के लिए एक मिटटी का बर्तन रहना जरुरी है। कमसे कम मिटटी का एक बर्तन हर एक परिवार ने अपने घर के आसपास अपने मोहल्ले में रखना चाहिए क्यों की ये किसीभी जानवर को पिने का ठंडा पानी दे सकता है। जिससे भरी धुप में उनकी प्यास बुझ सकती है और उनका बढ़ती गर्मीसे बचाव सकता है। घर की छत या बालकनी में भी ऐसा एक छोटा बर्तन पंछीयोंके लिए रखें। 
  • अगर आपके पास बैल, घोड़े, गधे जैसे मेहनती जानवर है तो दोपहर के समय उन्हें आराम करने देना चाहिए और उनपर पानी छिड़कते रहना चाहिए ताकि उनका शारीरिक तापमान कम होता रहे। 
  • मेहनती जानवरो को दिन में कमसे कम एक फल अवश्य खिलाये इससे उनके शरीर का शुगर लेवल बना रहेगा। 
ये थे कुछ टिप्स जो की सिर्फ कुत्ते या बिल्ली पालनेवालोंके लिए ही नहीं बल्कि खेती करने वाले के भी कामके है। इसीलिए इसे ज्यादासे ज्यादा शेयर करे क्यों की किसीका मेहनती जानवर उसकी रोजी रोटी का जरिया हो सकता है। अपने पास नहीं है पर हम सबके लिए काम करने वाले किसान के पास तो  जानवर है। उसकी मदत के लिए ये उसे बताये। अगर आप कुछ ऐसा करते हो जिससे किसीभी प्राणी की प्राणी की जान बच सकती है तो उसे अवश्य कमेंट करे ताकि बाकि वाचको के लिए मदत हो सके। मेरे अन्य लेख आप पढ़ सकते है। 

Monday, 30 March 2020

Eco-friendly places

Designing our places more eco-friendly is first step towards understanding nature around us. We humans powerfully manipulate the environment. Though human beings invented many scientific products we are unable to live outside the natural world of sun, sky, water, air, earth.
Increasing awareness of ecology is one step towards saving the environment. Also we can change our war weapons into tools of peace and our habits of destruction into conservation.
In this nature soil, water, air and sky still interact with sun for existence of life. Earth will always be full of life though humans get destroyed. Human can't destroy this planet because it always interacts with other parts of the nature.
Nature's life forces such as high winds, floods, eruption, earth quakes, avalanches, tsunamis, etc. are immensely powerful that humans can't control over them. Life is more powerful near water.
Though we are in the era of high speed internet and remote n robot technology we can feel the changes in nature. We feel that warm sunny June day is more pleasant than short rainy day. We still cheer up when spring arrives. We still want to travel at the places which are full of nature.
This feeling of relaxation in presence of nature is the wake up alarm to all humans that be alert and positively interact with nature so that we live longer with this powerful nature.
Thank you.

Tuesday, 28 May 2019

पासवर्ड


एक अजनबी आदमी एक आठ साल की लडकी से स्कूल के बाहर मिला और उससे बोला," तुम्हारी माँ एक मुसीबत मे है इसलिये तुम्हे घर ले जाने मुझे भेजा है।मेरे साथ चलो।" उस लडकी ने बिना झिझकते हुए पूछा," ठीक है। पासवर्ड क्या है??" वह आदमी निरूत्तर होकर चला गया।
दरअसल माँ बेटी ने एक पासवर्ड तय किया था जो आपातकाल मे माँ के द्वारा भेजे गये व्यक्ति को मालूम होना चाहिए था लेकिन वो पासवर्ड उसे मालूम नहीं था।
बात छोटी सी है परन्तु नन्ही सी सूझबूझ बडा संकट टाल सकती है।।
अभिभावक बच्चों को विद्यालयो मे मोबाइल नही दे सकते।पासवर्ड तो दे सकते है।

पढ़ने के लिए धन्यवाद। 

Tuesday, 25 September 2018

Man fears man

Oh! What a pity when man fears man
The most divine creation’s intellect goes wan
The shuddering cruelty, the quaking crime
How can death on life become prime?
Man is man's kith and 'kin
Killing one another is no one’s win
Love is God, Love is life 
Perception will abate strain and strife
Everything is timed, will turn into dust
Why this terror? Who are these terrorists?
Oh! Nothing, but life’s fogs and mists
Reason’s sunshine, emotions’ rain
Beautiful rainbows happiness gain Nature is universe, timeless, priceless
Limit your aims, curb your lust
Sans boundaries, erect fearless
Open your mind, the path will appear
Together we will shine, abolish all pain
No one is strange. no one to fear
Ensure this life is not in vain.
This poem I got from some old newspaper. You must know the beauty of life and love. End terrorism. This is written by Manjushree Sardeshpande. Thanks for reading till the end. For such more poems please share and follow this blog.

Thursday, 13 July 2017

Girls Think before you smoke - Danger warning

============================================================

 

Pictures on cigarette packet depicting the danger to inner organs of the body much helped many smokers to kick out the addiction. But in the era of modernisation girls and women are becoming habitual to smoking as SMOKING is considered as symbol of fashionable.

 

Teenaged girls mostly initiate smoking. The main reason is parent addiction or peer smoking. The busy adults allow teenagers to get in the unhealthy behaviours as they can not supervise their young one.

 

The risk of death from lung cancer among women who smoked is twenty five times more than that of men. A woman who smokes dies averagely 10 years sooner than who do not smoke. The smoking may cause heart diseases, stroke, pulmonary diseases and other cancers including breast cancer.

 

The new manufacturing of cigarettes which give a product with perforated filters, less irritating tobacco blends, porous paper are more dangerous as they allow deeper inhalation of the smoke. This results in higher nicotine level in the blood. This may lead chronic obstructive pulmonary diseases (COPD).

 

Smoking in women leads to fertility problems also. Some of common problems that may arise are ovulation problem, damage to reproductive organ, damaged eggs, increased risk of miscarriage and at last premature menopause.

 

It is never too late to quit smoking. As you stop smoking your life starts becoming healthy and happy. You start feeling young and looking beautiful as you quit the smoke.

 






Wednesday, 25 January 2017

तळतळाट

खरंच! हा दुष्काळ आहे, की....

की हे तळतळाट आहेत...

लग्नात कूंकू माखून उधळल्या शितांचे...!



गुलाबजामुनच्या  पाकातून गटारात फेकलेल्या साखरेचे...

तिला बनवणार्‍या उसाचे...

उसासाठी राबलेल्या शेतकर्‍याचे...!



इडली खाऊन उरलेल्या सांबाराचे...

त्यात शिजलेल्या डाळीचे...

तिच्याबरोबर फेकल्या गेलेल्या शेवग्याचे...!



यांच्या खताचा मारा झेलून नापीक झालेल्‍या मातीचे,

तिच्यात उसवलेल्या अन्नसाखळीतील अळीपासून घारीचे...!



तहान भागताच फेकलेल्या अर्ध्या ग्लास पाण्याचे...

वॉटर किंगडममधून समुद्रात गेलेल्या गोड्या सांडपाण्याचे,



मोर्चात रस्त्यावर, श्रावणात पिंडीवर  ओतलेल्या दुधाचे,

ते न मिळालेल्या वासराचे...!



वाढदिवशी न कापता तोंडाला फासलेल्या केकचे...

एनए शिक्का मारून घराखाली गेलेल्या शेतांचे,



बीअर आणि शीतपेयात नासलेल्या पाण्याचे...

शँपेनच्या कारंजातून जमिनीवर सांडलेल्या द्राक्षांचे...!

मातीमोल.. मातीमोल ठरलेल्या मातीचे...!!


Tuesday, 23 December 2014

केळीच्या पानावर जेवण का.. ?

हिंदू धर्म ग्रंथा मध्ये केळीच्या झाडाला पवित्र मानण्यात आले आहे. याच कारणा मुळे या झाडाची पूजा केली जाते. काही विशेष पूजन कर्मा मध्ये या झाडाच्या पानांचा मंडप ही तयार केला जातो. हे झाड भगवान विष्णूला प्रिय आहे. यामुळे ज्या लोकांचे लग्न जमण्यास उशीर होता आहे त्यांना या झाडाची पूजा करण्यास सांगितले जाते.... वास्तु नुसार केळीचे झाड घराच्या समोर किंवा बागे मध्ये लावणे शुभ मानले जाते......

भारतातील काही भागां मध्ये या झाडाच्या पवित्र ते मुळे याचा उपयोग जेवण करण्यासाठी केला जातो. यामागे धार्मिक तसेच वैज्ञानिक कारण आहे. आज आम्ही तुम्हाला केळीच्या पानांवर जेवण केल्याने कोण कोणते फायदे होतात या संदर्भात माहिती देत आहोत......

१]केळीच्या पानां मधून मिळणारे फायबर चटई, जाड पेपर, पेपर पल्प बनवण्या साठी उपयोगात आणले जाते. केळीच्या पानांवर गरम जेवण वाढल्याने त्या पानांमध्ये असलेले पोषक तत्व अन्नात मिसळतात, जे शरीरा साठी चांगले असतात.....

२]केळीच्या पानांवर जेवण केल्यास डाग-खाज, पुरळ-फोडं अशा समस्या दूर होतात.…

३]केळीच्या पाना मध्ये अधिक प्रमाणात एपिगालोकेटचीन गलेट आणि इजीसीजी सारखे पॉलीफिनोल्स एंटीऑक्सीडेंट आढळतात. केळीच्या पानावर जेवण केल्यास हे एंटीऑक्सीडेंट आपल्या शरीराला मिळतात. हे एंटीऑक्सीडेंट त्वचेला दीर्घ काळा पर्यंत तरुण ठेवण्यास मदत करतात.……

४]त्वचेवर पुरळ, डाग, मुरूम असतील तर केळीच्या पानावर खोबरेल तेल टाकून हे पान त्वचेवर गुंडाळल्यास त्वचेचे आजार लवकर ठीक होतात.……

Thursday, 18 December 2014

खोबरेल तेल

जुन्या वर नवा प्रकाश
कोकोनट ऑइल
डॉ. मीना नेरुरकर
     गेली तीस वर्षे नारळाच्या खोबर्‍याला,खोबरेल तेलाला आरोग्यबाधक ठरवल्यावर त्याचे ग्रह पालटले आहेत. दिवसागणिक वाढत असलेल्या अल्झायमर या रोगावर जालीम उपाय म्हणून खोबरेल तेलाला आता महत्त्व आलेले आहे. अमेरिकेत डॉक्टर पेशंटना टोस्टवर खोबरेल तेल लावून द्या असे सांगत आहेत. इतके दिवस आजूबाजूचा काहीही गंध नसलेली अल्झायमर पीडित जनता महिनाभराच्या टोस्टवरच्या खोबरेल तेलाने एकेकाळचे परिचित जग परत नव्याने ओळखायला लागलेली आहे.
     कोकोनट ऑइलचे भाग्य पालटायला डॉ. ब्रूस फाइफ याच्या रूपाने गॉड़ादर लाभला. अमेरिकेच्या र्‍होड आयलंड राज्यात राहणार्‍या या न्यूट्रिशनल डॉक्टरचा शेजारी पॉल सोएर्स नावाचा फिलिपिनो माणूस होता. पॉल मिरॅकल ऑइल विकायचा. आजूबाजूची फिलिपिनो जनता काहीही झाले की, त्याच्या दुकानात धावत यायची व तेल घेऊन जायची. कुतुहल म्हणून ब्रूसने एके दिवशी पॉलला विचारणा केली. पॉल म्हणाला, थायलंड वा फिलिपाइन्स देशातून नारळ आणतो, नारळाच्या डोळ्यात खिळा घालून पाणी काढतो, मग तो हातोड्याने फोडतो, आतले खोबरे किसतो, ते पाण्यात उकळत ठेवतो, पाणी आटून वर राहते ते कोकोनट ऑइल. कसल्याही व्याधीवर उपचार म्हणून देतो.
      डॉ. ब्रूस न्यूट्रिशनिस्ट असल्यामुळे त्याला प्रक्रिया न झालेल्या नैसर्गिक खाद्यपदार्थामध्ये रस होता. खोबर्‍यातून तेल काढण्याची किचकट प्रक्रिया सोपी करायला ब्रूसने खूप मदत केली. पॉलला खोबरे वाटायला मिक्सर आणून दिला. खोबर्‍यातून तेल काढायला द्राक्षातून वाइन काढायचा प्रेस आणून दिला. आता तेल काढणे खूप सोपे झाले. पॉलच्या सांगण्यावरून काहीही दुखत असले की, ब्रूसने चमचाभर कोकोनट ऑइल तोंडाने घ्यायला सुरुवात केली. कापलेल्या खरचटलेल्या ठिकाणी कोकोनट ऑइल लावायला सुरुवात केली. ब्रूसचे वजन कमी झाले, त्याची त्वचा तुकतुकीत दिसायला लागली.जखम पटकन भरायला लागली. ब्रूसच्या आश्चर्याला पारावर उरला नाही.
        इतके दिवस नारळाला का वाईट म्हणत होते याबद्दल त्याने खोलात जाऊन तपास करायला सुरुवात केल्यावर त्याला आढळून आले की, सोयाबीन इंडस्ट्रीने जगात पाय रोवण्यासाठी मुद्दामहून खोबर्‍याविरुद्ध अपप्रचार करायला सुरुवात केली होती. सगळे जण हार्ट ऍटॅकला घाबरतात. खोबरेल तेलात स्निग्धांश जास्त असतात व त्याने हार्ट ऍटॅक येतो, पण सोयाबीनचे पदार्थ खाल्ले तर हृदयविकार कमी होतात असा खोटा प्रचार सुरू केला. झाले. घाबरट लोकांनी हा रिपोर्ट वाचल्यावर कोकोनटचे पदार्थ खाणे कमी केले. चाणाक्ष सोयाबीन इंडस्ट्रीने स्वत:चे घोडे पुढे दामटले.
        ब्रूसने नारळ वापरत असलेल्या देशात जाऊन खोबरेल तेलावर संशोधन केले. खोबर्‍यात असतात ते Medium chain fatty acids असतात जे शरीराला हितकारक असतात. थायलंड,इंडोनेशिया फिलिपाइन्स, पॉलिनेशियन देश खोबर्‍यावर जगतात. त्यांच्यात हार्ट ऍटॅकचे प्रमाण जगापेक्षा खूप कमी आहे. ब्रूसने शोधाअंती खोबर्‍यामुळे हार्ट ऍटॅक येत नाही असे विधान केले.
     १९९९साली त्याने Coconut Oil miracle या नावाचे पुस्तक स्वत:च प्रसिद्ध केले. ते वाचून डॉ. मेरी न्यूपोर्ट हिने २००८ साली अल्झायमरच्या रोग्यांमध्ये कोकोनट ऑइलचा उपयोग करून पाहिला. फरक बघून तीदेखील चकीत झाली. इंटरनेटमुळे तो रिपोर्ट जगभर पसरला.
      डॉ. ब्रूसने एकूण १८ पुस्तके लिहिली. त्यांच्या अनेक आवृत्त्या निघाल्या. लोक एकमेकाला ही पुस्तके भेट द्यायला लागले. केस, त्वचा यावर खोबरेल तेल लावून बघायला लागले.आता अनेक तरुण मंडळी खोबरेल तेल सर्रास वापरतात. यू ट्यूबवर अनेक हेल्थ फूड डॉक्टर नारळाचे दूध कसे बिनधास्तपणे वापरावे याच्या रोज नव्या रेसिपीज देतात.
     माझ्या आजीच्या बटव्यात जगातल्या सगळ्या व्याधींवर अक्सर इलाज म्हणून एकच औषध होते ते म्हणजे खोबरेल तेल.परीक्षा आली की. डोकं थंड राहावे म्हणून ती माझ्या डोक्यावर खोबरेल तेल थापटायची, केस काळे राहावेत म्हणून आंघोळीच्या आधी डोक्याला खोबरल तेलाचा मसाज करायची, कातडी चरबरीत होऊ नये म्हणून अंगाला खोबरेल तेल चोळायची, कान दुखला तर कानात गरम खोबरेल तेलाची धार सोडायची.सर्दी झाली, डोके खाली करून नाकात गरम खोबरेल तेलाचे थेंब घालायची. ती जेव्हा ९५ व्या वर्षी गेली तेव्हा डोक्यावरचे सगळे केस शाबूत होते व काळे होते.
       सध्या माझी हॉर्वर्ड विद्यापीठातली हुशार मुलगी अदिती नियमितपणे खोबरेल तेल वापरते. पणजीसारखे डोक्याला अंगाला तर लावतेच, पण ब्रूसने सांगितल्याप्रमाणे रोज तीन चमचे तेल पिते. खोबरेल तेलात जेवण करते. खोबरेल तेलावर वाढूनही मी त्याचा वापर थांबवला म्हणून माझी कीव करते.
      कोकोनट गुरू डॉ. ब्रूसच्या अथक प्रयत्नांनी अमेरिकेतही खूप लोकप्रिय होत आहे. आता मीही न बिचकता वाटी वाटी सोलकढी पिते. आमट्या,उसळी,कालवणांना नारळाचे वाटण घालते. कोकोनट ऑइल अँटी एजिंग आहे असल्याचे रोज नवनवे रिपोर्ट बाहेर येत आहेत.

Sunday, 1 June 2014

विष मुक्त खेती

अगर किसी बात का बुरा लगा हो तो कृपया क्षमा कर देना |


मान लीजिये आपके परिवार या परीचीतोमे किसीको बच्चा होने वाला है| इस समय में पुरे परिवार में खुशियोंका इन्तेजार हो रहा है| डिलेवरी का वक्त हो चूका है| सभी बाहर इन्तेजार कर रहे है| तभी बच्चे की रोने की आवाज सुनाई देती है और आपका परिवार खुशीसे झूम उठता है| उस बच्चे को देखनेकी इच्छा सभीके मनमे जाग उठाती है| तभी डॉक्टर बाहर आ कर कहते है, "बच्चा विकलांग/अपाहिज/दिव्यांग पैदा हुआ है पर माँ ठीक है|"


ऐसी स्थिति में एकही सवाल मनमे आएगा, "क्यूँ मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ हुआ? मैंने किसका क्या बिगाड़ा था?" जवाब ढून्डटे रह जाओगे पर शायद नहीं मिलेंगा|


हा पर इतनी बड़ी घटना का एक कारण हो सकता है वो है Chemical Fetilizers & Pestsides.


अब आप कहेंगे chemical fertilizers और pesticides का इस घटना से क्या सम्बन्ध? इसीसे ही तो सारा सम्बन्ध है आपको होने वाली बिमार्योंका भी और विकलांग बच्चो का भी| क्यूंकि इसी खेतिसे आपका पूरा भोजन आता है|


तो क्या आप जानना नहीं चाहते की ये जहर कहासे आया? कितने प्रकारके जहर हम अपने बच्चो को खिलाते है? इस जहर को कौन बेचता है? कौन खरीदता है? क्यूँ खरीदता है? हमारी और हमारे बच्चोकी क्या गलतिया है? कौन रोकेगा इसे भगवान - सरकार या हम खुद?


भगवान भरोसे छोड़ना है तो फिर कोई चिंता नहीं इसे यही पढ़ना छोड़ दीजिये| सरकार के भरोसे रहना है तो इन्तेजार कीजिये जैसे पिछले ६७ साल किये वैसेही|



अगर हमें और आपको मिलकर रोकना है तो निचे दी गयी  लिंक पर क्लिक करिए और पूरा video देखिये और समझिये|

https://www.youtube.com/watch?v=Onp9YZ8_GXM



Strategic Alliances

  Strategic Alliances -  For any achievement gone need the right person on your team.  Sugriv was very keen on this. Very first Sugriva was ...