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Tuesday, 14 June 2022
माँ तुम आओ
Sunday, 5 June 2022
बारों में आरती गणपतचरना
आरती
बारों
में आरती गणपतचरना।
बरगजवदना
गिरिजानंदना॥ बारो.॥धृ.॥
कोमल
पदपंकज सुकुमार।
झ्यंझन
नुपुर कर घनघोर ॥ बारो.॥१॥
पीतांबर
कटी नाभि सुब्याळ।
लंबोधर
गरे मोहन माल॥॥ बारो.॥२.॥
रतनमुकुट
सिस चंद सुमनिये।
श्रवणच्युवत
मद कुंडल सोहे॥ ॥ बारो.॥३.॥
अनुपम
रुप तेरो कांहालो बखानू।
मंगिशसुत
शरणागता ज्यानू॥ बारो मे॥४.॥
Wednesday, 25 May 2022
गजानंदजी की स्तुति
दद अक्षर टालो भरो अन धन्न का भण्डारजी ।
गुरु नंद का ध्यान विनती करु बारंबारजी।
कहे माधोसिंह पढीयार आ बेड़ा लगादो पारजी ।
म्हाकौ समा में रंग बरसावोजी लारे रिद्ध सिध्द संग मैं ल्यावो।। टेर
गढ रणत भंवर का राजा थाके बाजे नौबत बाजा ।
माता गिरजा के हो लाला थाके चढे मिठाई माला ।
बाबा थे तो दुंद दूँदाला थाने कहवे सूंड सूंडाला।
म्हारे रमता खेलता आबोजी सव देवां में बड़ा कहावो । महाराज
थे अन धन देवण वाला संकट का काटण वाला ।
कहे माधोसिंह सुण देवा म्हें करां आप की सेवा ।
म्हारा मनकी आस पुरावोजी गुरूनंदजी का मान बढ़ावो । महाराज
Sunday, 15 May 2022
Leaders have to make leaders
Leaders have to make leaders- If you want to grow then you must be able to identify a person who can handle the situation even in your absence with presence of mind, by taking initiative, keeping calm, and acting like a diplomate. Only Hanuman was having the strength to fly up to Lanka and find Sita. Ram, Sugriva, and Jamvant were the prominent leaders but they identified the leadership qualities of Hanuman. Hanuman met Sita at Ashok Vatika and gave the message of Ram to her- and this task was over. But Hanuman intentionally destroyed Ashok Vatika ad purposely surrendered to soldiers so that he can analyse Ravana and his cabinet and the situation around Sita. In this course Ravan Hanuman was not offered a chair, so he made his own by his tail taller than Ravana to show his dominance. Ravana ordered to set fire to Hanuman's tail, but he used it to set fire to Lanka. All these activities of Hanuman were not the monkey's act but the use of the situation to show the dominance of Ram over Ravana.
Sunday, 1 May 2022
सुर मुनि-पूजित गणनायक की॥
सुर मुनि-पूजित गणनायक की॥
एकदंत, शशिभाल, गजानन,
विघ्नविनासक, शुभगुण कानन,
शिवसुत, वन्द्यमान-चतुरानन,
दु:खविनाशक, सुखदायक की।
ऋद्धि-सिद्धि स्वामी समर्थ अति,
विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति,
अघ-वन-दहन, अमल अविगत गति,
विद्या, विनय-विभव दायक की।
पिङ्गलनयन, विशाल शुंडधर,
धूम्रवर्ण, शुचि वज्रांकुश-कर,
लम्बोदर, बाधा-विपत्ति-हर,
सुर-वन्दित सब बिधिलायक की॥
Saturday, 23 April 2022
जय गणेश देवा।
आरती
जय
गणेश, जय
गणेश, जय
गणेश
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
लडुअन के भोग लागे, सन्त करें सेवा। जय ..
एकदन्त, दयावन्त, चार भुजाधारी।
मस्तक सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी॥ जय ..
अन्धन को आंख देत, कोढि़न को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥ जय ..
हार चढ़े, पुष्प चढ़े और चढ़े मेवा।
सब काम सिद्ध करें, श्री गणेश देवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
विघ्न विनाशक स्वामी, सुख सम्पत्ति देवा॥ जय ..
पार्वती के पुत्र कहावो, शंकर सुत स्वामी।
गजानन्द गणनायक, भक्तन के स्वामी॥ जय ..
ऋद्धि सिद्धि के मालिक मूषक सवारी।
कर जोड़े विनती करते आनन्द उर भारी॥ जय ..
प्रथम आपको पूजत शुभ मंगल दाता।
सिद्धि होय सब कारज, दारिद्र हट जाता॥ जय ..
सुंड सुंडला, इन्द इन्दाला, मस्तक पर चंदा।
कारज सिद्ध करावो, काटो सब फन्दा॥ जय ..
गणपत जी की आरती जो कोई नर गावै।
तब बैकुण्ठ परम पद निश्चय ही पावै॥ जय .
Saturday, 16 April 2022
देवी का गीत
उच्चा री कोट सुरंग दे मेरी जाल माँ, तेरी हरियल पीपल बाहर मेरी माँ
उच्चा री पिपल रानी पडी ए पंचाली, म्हारै जै कोई झुलन आवे मेरी माँ
देवी री झुलै रानी लोकड़ियां झुलावै, म्हारै धन राजा झोटे देव मेरी माँ
पहला री झोटा रानी हार गुमाया, दूजा कान की बाली मेरी माँ
तीजा री झोटा रानी होई ए तिसाई, जै कोई पानीड़ा पिलाव मेरी माँ
कोरा री घड़वा रानी षीतल पानी, धन राजा आन पिलावै मेरी माँ
सोवो के जागो म्हारी आज भवानी, थारै धोलै गढ़ बुगले छाई मेरी माँ
तिल-तिल सोऊ रानी जोए-जोए जागु,
म्हारै धोलैगढ़ जोत संवाई मेरी माँ
गले रानी थारै सतलैड़ा सोवै, थारै ऊपर हार हजारी मेरी माँ
कान रानी थारै कुण्डल सोवै, ऊपर तोता वाली मेरी माँ
अंग रानी थार साड़ी सोवै, ऊपर चून्दड भारी मेरी माँ
हाथ रानी थारै चुड़ला सोवै, थारै मेहँदा री जोत सुवाई मेरी माँ
पैर रानी थारै पायल सोवै, थारै बिछुवा नै रुण झुण लाई मेरी माँ
सवा ए तो मण की रानी करूँ ए कढ़ाई,
थारै सोने का छत्र चढ़ाऊँ मेरी माँ
इबक तो गुनाहे बकस दे भवानी, तेरी जय-जय करती आऊँ मेरी माँ
तेरै गोद झडु़ला लाऊँ मेरी माँ, सदा ए गठ जोड़े से आऊँ मेरी माँ
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Friday, 1 April 2022
अम्बे माँ की आरती
जय माता दी! नवरात्र हो या कोई भी दिन माता की भक्ति मन को शांति ही देती है| इसके लिए अम्बे माँ की आरती खास आपके लिए| खुद पढ़िए, गाइए - मन को आनंद मिलेगा|
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुम को निस दिन ध्यावत
मैयाजी को निस
दिन
ध्यावत
हरि
ब्रह्मा
शिवजी
।| जय अम्बे
गौरी
॥
माँग सिन्दूर विराजत
टीको
मृग
मद को |मैया टीको
मृगमद
को
उज्ज्वल से दो नैना
चन्द्रवदन नीको|| जय अम्बे
गौरी
॥
कनक समान कलेवर
रक्ताम्बर साजे| मैया
रक्ताम्बर साजे
रक्त पुष्प गले
माला
कण्ठ
हार
साजे||
जय अम्बे
गौरी
॥
केहरि वाहन राजत
खड्ग
कृपाण
धारी| मैया
खड्ग
कृपाण
धारी
सुर नर मुनि
जन सेवत
तिनके
दुख
हारी||
जय अम्बे
गौरी
॥
कानन कुण्डल शोभित
नासाग्रे मोती| मैया
नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर
सम राजत
ज्योति||
जय अम्बे
गौरी
॥
शम्भु निशम्भु बिडारे
महिषासुर घाती| मैया
महिषासुर घाती
धूम्र विलोचन नैना
निशदिन
मदमाती||
जय अम्बे
गौरी
॥
चण्ड मुण्ड शोणित
बीज
हरे| मैया
शोणित
बीज
हरे
मधु कैटभ दोउ
मारे
सुर
भयहीन
करे||
जय अम्बे
गौरी
॥
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम
कमला
रानी| मैया
तुम
कमला
रानी
आगम निगम बखानी
तुम
शिव
पटरानी||
जय अम्बे
गौरी
॥
चौंसठ योगिन गावत
नृत्य
करत
भैरों| मैया
नृत्य
करत
भैरों
बाजत ताल मृदंग
और बाजत
डमरू||
जय अम्बे
गौरी
॥
तुम हो जग की माता
तुम
ही हो भर्ता| मैया
तुम
ही हो भर्ता
भक्तन की दुख
हर्ता
सुख
सम्पति
कर्ता||
जय अम्बे
गौरी
॥
भुजा चार अति
शोभित
वर मुद्रा
धारी| मैया
वर मुद्रा
धारी
मन वाँछित फल पावत
देवता
नर नारी||
जय अम्बे
गौरी
॥
कंचन थाल विराजत
अगर
कपूर
बाती| मैया
अगर
कपूर
बाती
माल केतु में
राजत
कोटि
रतन
ज्योती||
बोलो
जय अम्बे
गौरी
॥
माँ अम्बे की आरती
जो कोई
नर गावे| मैया
जो कोई
नर गावे
कहत शिवानन्द स्वामी
सुख
सम्पति
पावे||
जय अम्बे
गौरी
॥
देवी वन्दना
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता|
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||
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Thursday, 24 March 2022
शेंदूर लाल चढायो अच्छा गजमुखको ।
जय जयजी गणराज विद्या सुखदाता ।
धन्य तुमारो
दर्शन मेरा मन रमता ॥धृ॥
शेंदूर लाल चढायो अच्छा गजमुखको ।
दोंदिल लाल
विराजे सुत गौरीहरको ।
हाथलिये गुडलड्डू
साई सुरवरको ।
महिमा कहे न
जाय लागत हुं पदको ॥१॥
अष्टौ सिद्धी दासी संकटको बैरी ।
विघ्नविनाशन
मंगल मूरत आधिकारी ।
कोटीसूरज
प्रकाश ऎसी छबी तेरी ।
गंडस्थलमदमस्तक
झूले शशिबहारी ॥जय.॥२॥
भावभगतिसे कोई शरणागत आवे ।
संतति
संपत्ति सबही भरपूर पावे ।
ऐसे तुम
महाराज मोको अति भावे ।
गोसावीनंदन
निशिदिन गुण गावे ॥ जय.॥३॥
Tuesday, 13 October 2015
सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची
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Strategic Alliances
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