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Tuesday, 5 July 2022

नारायण मिल जाये

 

एक सब्ज़ी वाला था सब्ज़ी की पूरी दुकान साइकल पर लगा कर घूमता रहता था ।"भगवान" उसका तकिया कलाम था । कोई पूछता आलू कैसे दिये, 10 रुपये भगवान, हरी धनीया है  क्या ? बिलकुल ताज़ा है भगवान। वह सबको भगवान कहता था । लोग भी उसको भगवान कहकर पुकारने लगे।
मैने उससे पूछा तुम्हारा कोई असली नाम है भी या नहीं?
है न ,भगवान भैयालाल पटेल।
मैंने कहा तुम हर किसी को भगवान क्यों बोलते हो।
भगवान में शुरू से अनपढ़ गँवार हूँ। गॉव में मज़दूरी करता था,  गाँव में एक नामी सन्त की कथा हुईं  कथा मेरे पल्ले नहीं पड़ी लेकिन एक लाइन मेरे दिमाग़ में आकर फँस गई , उन्होंने कहा हर इन्सान में भगवान हैं -तलाशने की कोशिश तो करो पता नहीं किस इन्सान में मिल जाय ओर तुम्हारा उद्धार कर जाये, बस उस दिन से मैने हर मिलने वाले को भगवान की नज़र से देखना ओर पुकारना शुरू कर दिया  वाकई चमत्त्कार हो गया दुनिया के लिए शैतान आदमी भी मेरे लिये भगवान हो गया  ऐसे दिन फिरें कि मज़दूर से व्यापारी हो गया सुख समृद्धि के सारे साधन जुड़ते गये मेरे लिये तो सारी दुनिया ही भगवान बन गईं।
लाख टके की बात
जीवन एक प्रतिध्वनि है आप जिस लहजे में आवाज़ देंगे पलटकर आपको उसी लहजे में सुनाईं देंगीं। न जाने किस रूप में नारायण मिल जाये

Tuesday, 28 June 2022

कौन कहता है

 

1)
कौन कहता है कान्हा के दर्शन होते नहीं..?
मीरा के जैसी भक्त
शबरी के जैसी विश्वास
यशोदा के जैसी ममता
राधा के जैसी श्रद्धा हो तो..
कान्हा घर आ जाएँ दर्शन देने के लिए।
2)
कौन कहता है इंसान रंग नही बदलता
किसी के मुंह पर सच बोल कर तो देखिए
एक नया रंग सामने आएगा
3)
कौन कहता है पैसा सब कुछ खरीद सकता है।
दम है तो जरा टुटे हुये विश्वास को खरीद के बताऔ
4)
कौन कहता है  , रब नज़र नहीं आता
वही नज़र आता है जब नज़र कुछ नहीं आता
5)
कौन कहता है की दुआ कुबूल नही होती
बस इबादत में दिल मासूम होना चाहिए
6)
कौन कहता है कि दूरियां किलोमीटरों में नापी जाती हैं
खुद से मिलने में भी उम्र गुज़र जाती है 
7)
कौन कहता है सिर्फ़ सँवरने से बढ़ती है खूबसूरती..
दिलों में ख़ुशी हो तो चेहरे यूँ ही निखर आते हैं.
8)
कौन कहता है के तन्हाईयाँ अच्छी नहीं होती
बड़ा हसीन मौका देती है ये ख़ुद से मिलने का

Tuesday, 7 June 2022

शालिग्राम

 

नेपाल में गंडकी नदी के तल में पाए जाने वाले काले रंग के चिकने, अंडाकार पत्थर को कहते हैं। ये भगवान विष्णु का ही एक स्वरुप कहलाते है। तुलसी के श्राप स्वरुप भगवान विष्णु को शालिग्राम बनना पड़ा था।  अधिकतर घरों में पूजा के लिए शालिग्राम रखे जाते है। आइये जानते है शालिग्राम से जुडी कुछ ख़ास बातें-
1. स्वयंभू होने के कारण शालिग्राम की प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती और भक्त जन इन्हें घर या मंदिर में सीधे ही पूज सकते हैं।
2. शालिग्राम अलग-अलग रूपों में पाए जाते हैं, कुछ मात्र अंडाकार होते हैं तो कुछ में एक छिद्र होता है ये पत्थर के अंदर शंख, चक्र, गदा या पद्म खुदे होते हैं।
3. भगवान शालिग्राम का पूजन तुलसी के बिना पूर्ण नहीं होता और तुलसी अर्पित करने पर वे तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं।
4. श्री शालिग्राम और भगवती स्वरूपा तुलसी का विवाह करने से सारे अभाव, कलह, पाप ,दुःख और रोग दूर हो जाते हैं।
5. तुलसी शालिग्रामविवाह करवाने से वही पुण्य फल प्राप्त होता है जो कन्यादान करने से मिलता है।
4. पूजन में श्री शालिग्राम जी को स्नान कराकर चंदन लगाकर तुलसी दल अर्पित करना और चरणामृत ग्रहण करना चाहिए। यह उपाय मन, धन व तन की सारी कमजोरियों व दोषों को दूर करने वाला माना गया है।
5. पुराणों में तो यहां तक कहा गया है कि जिस घर में भगवान शालिग्राम हो, वह घर सारे तीर्थों से भी श्रेष्ठ है। इनके दर्शन व पूजन से समस्त भोगों का सुख मिलता है।
6. भगवान शिव ने भी स्कंदपुराण के कार्तिक माहात्मय में भगवान शालिग्राम की स्तुति की है। ब्रह्मवैवर्तपुराण के प्रकृतिखंड अध्याय में उल्लेख है कि जहां भगवान शालिग्राम की पूजा होती है वहां भगवान विष्णु के साथ भगवती लक्ष्मी भी निवास करती है।
7. पुराणों में यह भी लिखा है कि शालिग्राम शिला का जल जो अपने ऊपर छिड़कता है, वह समस्त यज्ञों और संपूर्ण तीर्थों में स्नान के समान फल पा लेता है।
8. जो निरंतर शालिग्राम शिला का जल से अभिषेक करता है, वह संपूर्ण दान के पुण्य व पृथ्वी की प्रदक्षिणा के उत्तम फल का अधिकारी बन जाता है।
9. मृत्युकाल में इनके चरणामृत का जलपान करने वाला समस्त पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक चला जाता है।
10. जिस घर में शालिग्राम का रोज पूजन होता है उसमें वास्तु दोष और बाधाएं अपने आप समाप्त हो जाती हैं।

Tuesday, 31 May 2022

विष्णुअर्पण

 

भक्त के भाव... 

एक पुरानी कहानी  है कि एक पण्डित जी ने अपनी पत्नी की आदत बना दी थी कि घर में रोटी खाने से पहले कहना है कि "विष्णु अर्पण" अगर पानी पीना हो तो पहले कहना है कि"विष्णु अर्पण" उस औरत की इतनी आदत पक्की हो गई
की जो भी काम करती पहले मन में यह कहती की 
"विष्णु अर्पण" "विष्णुअर्पण" फिर वह काम करती एक दिन उसने घर का कूड़ा इक्कठा किया और फेंकते हुए कहा की  "विष्णु अर्पण""विष्णु अर्पण" वहीँ पास से  नारद मुनि जा रहे थे ,नारद मुनि ने जब यह सुना तो उस औरत को थप्पड़ मारा की विष्णु जी को कूड़ा अर्पण कर रही है फैक कूड़ा रही है और कह रही है कि "विष्णु अर्पण" वह औरत विष्णु जी के प्रेम में रंगी हुई थी  कहने लगी नारद मुनि तुमने जो थप्पड़ मारा है वो थप्पड़ भी  "विष्णु अर्पण" अब नारद जी ने दुसरे गाल पर थप्पड़ मारते हुए कहा कि बेकूफ़ औरत तू थप्पड़ को भी विष्णु अर्पण कह रही है । लेकिन उस औरत फिर यही कहा आपका मार यह थप्पड़ भी "विष्णु अर्पण"
" जब नारद मुनि  विष्णु पूरी में गए तो क्या देखते है कि विष्णु जी के दोनों गालों पर उँगलियों के निशान बने हुए थे " , नारद  पूछने लगे कि"भगवन यह क्या हो गया" ? आप जी के चेहरे पर यह निशान कैसे पड़े", 
विष्णु जी कहने लगे कि "नारद मुनि थप्पड़ मारे भी तू और पूछे भी तू" , नारद जी कहने लगे की "मैं आप को थप्पड़ कैसे मार सकता हूँ"?, विष्णु जी कहने लगे,
"नारद मुनि जिस औरत ने  कूड़ा फेंकते हुए यह कहा था की विष्णु अर्पण और तुने उस को थप्पड़ मारा था तो वह थप्पड़ सीधे मेरे को ही लगा था , क्योकि वह मुझे अर्पण था"...

कथा सार :-जब आप कर्म करते समय कर्ता का भाव निकाल लेते है। और अपने हर काम में मै मेरी मेरा की भावना हटा कर अपने इष्ट या सतगुरु को आगे रखते है तो करमो का बोझ भी नहीं बढ़ता और वो काम आप से भी अच्छे तरीके से होता है  !!


          राधे राधे 

Strategic Alliances

  Strategic Alliances -  For any achievement gone need the right person on your team.  Sugriv was very keen on this. Very first Sugriva was ...