एक गाव में दो भाई रहते थे. दोनों बहुत आलसी थे. उनकी आय का एक मात्रा स्तोत्र उनके घर में लगे हुआ आम का पेड़ था. उसके आम से जो पैसा मिलता उसी से अपना गुजर बसर करते थे. दोनों इतने आलसी थे की गर्मी में सिर्फ आम ही खाते थे. कोई रिश्तेदार भी आ जाए तो वो उन्हें सिर्फ आम ही खिलाते थे. गर्मी के अलावा अन्य मौसमो में जब आम के पेड़ पे अच्छे आम नहीं आते तो वे बचेकुचे पैसो से ही कम चलते थे. और वे ख़तम हो जाए तो वे पड़ोसियों से पैसे मांगते. एक दिन गर्मी के मौसम में उनका एक रिश्तेदार आया उन्होंने उसे भी आम ही खिलाया. वो रिश्तेदार हमेशा आम खाकर उब चूका था. तो उसने आम का पेड़ काटा और वहा से भाग गया. अब दोनों भाइयो के पास मेहनत करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा था. अपने पालन पोषण के लिए यही एक उपाए था. कुछ सालो के बाद वही रिश्तेदार जब वापिस आया तो उनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी थी. उन्होंने उसका स्वागत किया और अपनी गलती को समझ गए.
You are welcome to this blog where you can find a cluster of stories and poems, in various languages spoken in the Indian Sub-continent including English, Hindi, Marathi, Rajasthani, and many more.
YouTube
Monday, 1 February 2021
Thursday, 21 January 2021
संगत
एक भंवरे की मित्रता एक भंवरे की मित्रता एक गोबरी कीड़े के साथ हो गई!!
कीड़े ने भंवरे से कहा - भाई ! तुम मेरे सबसे अच्छे मित्र हो, इसलिये मेरे यहाँ भोजन पर आओ
अगले दिन सुबह भंवरा तैयार हो कर अपने बच्चों के साथ गोबरी कीड़े के यहाँ भोजन के लिये पहुँचा
कीड़ा उन को देखकर बहुत खुश हुआ, और सब का आदर करके भोजन परोसा भोजन में गोबर की गोलियाँ परोसी, और कीड़े ने कहा - खाओ भाई !
भंवरा सोच में पड़ गया कि - मैंने बुरे का संग किया, इसलिये … मुझे गोबर तो खाना ही पड़ेगा ये सब मुझे इसका संग करने से मिला, और फल भी पाया अब इसे भी मेरे संग का फल मिलना चाहिये
भंवरा बोला - भाई ! आज मैं आपके यहाँ भोजन के लिये आया, अब तुम भी कल मेरे यहाँ आओगे
अगले दिन कीड़ा तैयार हो कर … भंवरे के यहाँ पहुँचा भंवरे ने कीड़े को उठा कर, गुलाब के फूल में बिठा दिया कीड़े ने फूलों का रस पिया फिर अपने मित्र का धन्यवाद किया, और कहा - मित्र ! तुम तो बहुत अच्छी जगह रहते हो, और अच्छा खाते हो
इस के बाद कीड़े ने सोचा - क्यों न अब मैं यहीं रह जाऊँ, और ये सोच कर कीड़ा फूल में ही बैठा रहा,तभी वहाँ पास के मंदिर का पुजारी आया फूल तोड़ कर ले गया, और चढ़ा दिया … बिहारी जी और राधा जी के चरणों में
कीड़े को भगवान के दर्शन भी हुये, और उनके चरणों में बैठने का सौभाग्य भी
इस के बाद संध्या में पुजारी ने सारे फूल इक्कठा किये, और गंगा जी में छोड़ दिए कीड़ा गंगा की लहरों पर लहर रहा था, और अपनी किस्मत पर हैरान था कि … कितना पुण्य हो गया
इतने में ही भंवरा उड़ता हुआ कीड़े के पास आया और बोला - मित्र ! अब बताओ … क्या हाल है ?
कीड़े ने कहा - भाई ! अब जन्म-जन्म के पापों से मुक्ति हो चुकी है, जहाँ गंगा जी में मरने के बाद अस्थियों को छोड़ा जाता है, वहाँ मैं जिन्दा ही आ गया हूँ. ये सब मुझे तेरी मित्रता और अच्छी संगत का ही फल मिला है जिसको मैं अपनी जन्नत समझता था, वो तो गन्दगी थी, और … जो तेरी वजह से मिला - यही स्वर्ग है
संगत से गुण ऊपजे,
संगत से गुण जाए
=========
=======================================================================
My YouTube Channel:
https://www.youtube.com/channel/UC4omGoxEhAT6KEd-8LvbZsA
Visit my blogs
allinoneguidematerial.blogspot.com
lokgitbhajanevamkahaniya.blogspot.com
My Telegram Channel
Twitter Handle
https://twitter.com/rohinigilada2
Please visit all my profiles and follow me there as well as share this with everyone.
Strategic Alliances
Strategic Alliances - For any achievement gone need the right person on your team. Sugriv was very keen on this. Very first Sugriva was ...
-
Once there lived a snake and cab in a Jungle. The crap behaved politely with the snake in all simplicity and kindness. But the snake was alw...
-
Today is friendship day and here is a beautiful poem I came across from a newspaper. This is my friendship day wish to all my readers and fo...
-
Jay Shree Ram Friend! How are you? Here is collection of some motivational lines. Please read each line carefully with peaceful mind. 1*...