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Friday, 28 May 2021

मेरी बेटी का घर

जय श्री राम सखियों  और सखाओ। आज  आपके लिए स्त्रीधन का महत्त्व बताने वाली एक कहानी लेकर आयी हु। स्त्री  के अधिकार का धन जो उसे उसके परिजन देते है उसे स्त्रीधन कहते है। और यह कई सदियों की भारत की परम्परा रही है बस बिच के कुछ १०००-१२०० साल भारत में स्त्री को अतीव पीड़ाये भोगनी पड़ी है। इसीलिए आज भी हिन्दू लॉ में स्त्रीधन का महत्व बताया गया है।  


Image: GharExpert


सारिका बहुत प्रसन्न थी आज। आखिरकार बीस सालों की कड़ी मेहनत के बाद जमा रकम से घर खरीदने का उसका सपना पूरा होने जा रहा था। वो बेचैनी से अपने पति अनंत के आने का इंतज़ार कर रही थी। अनंत के आने पर सारिका ने उसे ये खुशखबरी दी और साथ चलकर घर देखने के लिए कहा।
अनंत ने कहा- एक और घर की क्या जरूरत है? ये घर तो है ही।
सारिका ने कहा- जरूरत है अनंत, हमारी बेटी के लिए।
तुम्हें क्या लगता है मैं अपनी बेटी की शादी किसी सड़क छाप से करूँगा जो उसे अलग से घर की जरूरत पड़ेगी- अनंत ने कहा।
सारिका बोली- नहीं अनंत। मैं बस ये चाहती हूँ कि इस दुनिया में एक जगह ऐसी हो जिस पर सिर्फ मेरी बेटी का हक हो। जहां से उसे कोई भी किसी भी वजह से निकाल ना सके।
अनंत ने हैरान होते हुए कहा- क्या मतलब?
सारिका बीते दिनों को याद करते हुए बोली- याद है एक बार किसी बात पर झगड़ा होने पर तुमने मुझसे कहा था- निकल जाओ मेरे घर से।
रोते हुए जब मैं मायके पहुँची तो माँ-पापा, भैया-भाभी ने साफ शब्दों में कह दिया- अब तुम्हारे पति का घर ही तुम्हारा घर है। यहां तुम बस मेहमान हो।
तुम थोड़ी ही देर में मुझे मनाने आ गए थे, लेकिन उसी वक्त मैंने तय कर लिया था कि मैं अपनी बेटी को इन शब्दों का सामना करने नहीं दूँगी। उसके पास मायके और ससुराल के अलावा उसका एक घर भी होगा।
अनंत सारिका की बातें सुनकर खुद पर लज्जित हो रहा था।
उसने कहा- लेकिन अगर भविष्य में हमारे बेटे ने विरोध किया, जायदाद के लिए अपनी बहन को परेशान किया तो?
सारिका ने कहा- मैंने सब पता कर लिया है। चूँकि ये घर पैतृक नहीं है तो मैं इसे किसी को भी दे सकती हूँ। लेकिन फिर भी मैं एनओसी पर हमारे बेटे के दस्तखत करवा के ही अपनी बेटी को ये घर दूँगी, ताकि भविष्य में उसे किसी परेशानी का सामना ना करना पड़े।
बेटे के लिए तो तुम्हारा ये घर है ही। मुझे यकीन है इसके बाद उसे कोई आपत्ति नहीं होगी।
सारिका की सारी बातें सुनकर अनंत ने कहा- कितना सोचती हो तुम। मैं इतना सोचूँ तो पागल ही हो जाऊँ।
सारिका ने हँसते हुए कहा- सोचना पड़ता है, क्योंकि तुम्हारे पास घर है, हम औरतों की तरह मायका और ससुराल नहीं।
अनंत ने सारिका का हाथ थामते हुए कहा- मेरी गलती के लिए मुझे क्षमा कर दो सारिका। आओ चलो हम अपनी बेटी के लिए उसका घर पसंद करने चलें।
नए घर में कदम रखते हुए सारिका की आँखों में संतुष्टि के भाव थे और अनंत की आँखों में अपनी पत्नी के लिए गर्व झलक रहा था।


हो सकता है की ये कहानी आपने कही और भी पढ़ी हो। बेटिया अपने ससुराल विवाह के पश्चात चली जाती है। सही मायने में वही उनका अधिकार का घर होता है जो समाज मान्य है। परन्तु कई ऐसे लोग रहते है जो इस बात को समय रहते नहीं समझते है की जो बहु उनके घर आयी है वह उनके घर  अपना सबकुछ छोड़ कर आयी है। और समाज के नियम के अनुसार अब उस महिला का ससुराल ही उसका घर है। वह अपने कोमल हाथो से ससुराल के घर को संभालने आयी है। जो लोग इस बात को नहीं समझते वे अनंत की तरह अपनी पत्नी या बहु को तकलीफ देते है। और जो दहेज़ के लालची है वे तो समाज में रहने के लायक ही नहीं है। 
अगर आपको मेरी बात सही लगी हो तो इस कहानी को  शेयर करिये। धन्यवाद !


Saturday, 13 March 2021

जोक्स का पिटारा

और क्या हालचाल है मित्रों और सखियों? आज मै लेकर आई हु जोक्स का पिटारा| ये जोक्स पढ़ लीजिये और हसिये| सबके साथ शेयर करिए और उन्हें भी हासिये| ज्यादा से ज्यादा शेयर करिए और खुशिया फैलाइए|


1)

इतनी रिसर्च करने के बाद भी कोई ये नहीं पता लगा पाया की रिश्तेदारों से चाय के लिए पूछो तो बस आधा कप ही क्यों बोलते हैं

2)

यमराज :- बोलो प्राणी! तुम कहां जाना चाहते हो? स्वर्ग में या नर्क में?

आदमी :- प्रभू, पृथ्वी से मेरा मोबाइल और चार्जर मँगवा दो, मै कंही भी रह लूगाँ

3)

एक आदमी ने पड़ोसी की बीबी गुमने की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करा दी

पुलिस – पड़ोसी की बीबी के गुमने की रिपोर्ट तुम क्यों दर्ज करवा रहे हो

आदमी – मैं उस आदमी की खुशी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूं साला रोज पार्टी कर रहा है ।

4)

ससुर: आइए दामाद जी आज सुबह सुबह अचानक कैसे दर्शन दे दिए

दामाद : आपकी बेटी से झगड़ा हो गया था, वो बोली जहन्नुम में जाओ बस आ गया

5)

शौहर- हर सुबह जब मेरी आंख खुलती है तो मैं यही प्रार्थना करता हूं कि भगवान सबको तुम्हारे जैसी बीवी दे!

बीवी (खुश होते हुए)- अच्छा!

शौहर- हां… आखिर मैं अकेला ही दुखी क्यों रहूं?

6)

‪आज का ज्ञान-

जिंदगी बस 2 दिन की है एक तो शनिवार और दूसरा रविवार बाकी दिन तो ऐसा लगता है कि जलील होने के लिए पैदा हुए हैं।

-एक कर्मचारी

7)

नीरज – महिलाएं शराब से इतनी नफरत क्यों करती हैं?

प्रीतो – क्योंकि इसको पीने के बाद उनके चूहे जैसे शौहर शेरों जैसा बर्ताव करने लगते हैं

8)

एक खूबसूरत कमसिन लड़की ने एक बूढ़े अमीर आदमी से शादी कर ली.

उसकी सहेली ने उससे पूछा – तूने इनमे ऐसा क्या देखा जो शादी कर ली !

लड़की – एक तो इनकी इनकम, और दूसरे इनके दिन कम !

9)

सुरज :  यार,  सरकार ने वोटिंग करने के लिए 18 साल के होने का कानून बनाया है तो फिर शादी करने की उम्र 21 साल क्यों ?

नीरज :  देखो सरकार को भी पता है कि देश संभालना आसान है लेकिन बीवी संभालना नहीं

10)

बस कंडक्टर ने यात्रियों से कहा

भाइयों गेट पर मत लटको , अंदर आ जाओ ,

किसी ने नहीं सुनी।

कंडक्टर ने फिर कहा , 'तुम्हें अपनी बीवी की कसम है ,अंदर आ जाओ ,

ये सुनते ही जो सीट पर बैठे थे वो भी गेट पर लटक गए.


Friday, 5 March 2021

Good thoughts collection

1. The main thing is never quit, never quit, never quit.


2. Excellence is not a skill, it is an attitude.


3. Success is failure recycled.


4. And what better words it could be - please, thank you and sorry - to start with.


5. A good student can learn more from a bad teacher than a bad student from good teacher.


6. Ignorance is no crime, but unwillingness to learn indeed so.


7. extending a helping hand to a drowning man cannot save him unless he makes efforts to raise himself above the water.


8. Yourself be a lamp and get guided i.e. get illuminated youself through fervently seeking enlightenment. - Gautam Buddha.


9. The core of all efforts to get enlightenment is the urge to learn.


10. Without a clear, persistent and meaningful direction, you're not going to be very effective.


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Monday, 1 March 2021

गुरूर है मुझे मैं नारी हूँ

 

गुरूर है मुझे मैं नारी हूँ

भगवान की संरचना में शामिल ।

एक ख़ूबसूरत फूल हूँ

सभी के आँगन में , शामिल ।

रख़ती हूँ सबका खयाल ,

न आए किसी पर आँच

सबको खुशियाँ बाँटना चाहती हूँ

जो कमल के समान ,

सबके आँगन में खिलती हूँ ।

मैं कोई काँटा नहीं ,

जो किसी को चोट लगा दूँ ।

मैं कोई विष नहीं ,

जो नफ़रत फैला दूँ ।

मैं तो बस इस संसार का ,

ख़ूबसूरत फूल हूँ ,

जो इस संसार को ,

आनंदित करना चाहती हूँ ।

गुरूर है मुझे कि मैं नारी हूँ ।

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Monday, 15 February 2021

खिचड़ी का आविष्कार

 

कई वर्षों पहले एक बार,

दिन का नाम था रविवार।

पति-पत्नी की एक जोड़ी थी,

नोंकझोंक जिनमें थोड़ी थी।

अधिक था उनमें प्यार,

मीठी बातों का अम्बार।

सुबह पतिदेव ने ली अंगड़ाई,

पत्नी ने बढ़िया चाय पिलाई।

फिर नहाने को पानी किया गर्म,

निभाया अच्छी पत्नी का धर्म।

पति जब नहाकर निकल आए,

पत्नी ने बढ़िया पकौड़े खिलाए।

फिर पतिदेव ने समाचार-पत्र पकड़ा,

दोनों हाथों में उसे कसकर जकड़ा।

अगले तीन घंटे तक न खिसके,

रहे वो समाचार-पत्र से चिपके।

पत्नी निपटाती रही घर के काम,

मिला न एक पल भी आराम।

एक पल को जो कुर्सी पर टिकी,

पति ने तुरंत फरमाइश पटकी।

बोले अब नींद आ रही है ढेर सारी,

प्रियतमा बना दो पूड़ी और तरकारी।

पत्नी बोली मैं हूँ आपकी आज्ञाकारी,

लेकिन फ्रिज में नहीं है तरकारी।

पति बोले दोपहर तक कोहरा छाया है,

सूरज को भी बादलों ने छिपाया है।

ऐसे में तरकारी लेने तो न जाऊँगा,

छोड़ो पूड़ी, दाल-चावल ही खाऊँगा।

पत्नी बोली थोड़ी देर देखिए टीवी,

अभी खाना बनाकर लाती बीवी।

पति तुरंत ही गए कमरे के अंदर,

पत्नी ने रसोई में खोले कनस्तर।

दाल-चावल उसमें रखे थे पर्याप्त,

पर सिलेंडर होने वाला था समाप्त।

बन सकते थे चावल या फिर दाल,

क्या बनाएँ क्या न का था सवाल।

इतनी ठंड में पति को कैसे भेजूँ बाजार,

काँप-काँप उनका हो जाएगा बँटाधार।

इस असमंजस से पाने के लिए मुक्ति,

धर्मपत्नी ने लगायी एक सुंदर युक्ति।

कच्ची दाल में कच्चे चावल मिलाए,

धोकर उसने तुरंत कुकर में चढ़ाए।

कुछ देर में एक लम्बी सी आई सीटी,

पति के पेट में चूहे करने लगे पीटी।

पत्नी ने मेज पर खिचड़ी लगायी,

साथ में अचार और दही भी लायी।

नया व्यंजन देखकर दिमाग ठनका,

और पति के मुख से स्वर खनका।

बोले न तो है चावल न ही है दाल,

दोनों को मिलाजुला ये क्या है बवाल।

पत्नी बोली सिलेंडर हो गया खाली,

इसलिए मैंने चावल-दाल मिला डाली।

एक बार ही कुकर था चढ़ सकता,

दाल-चावल में से कोई एक पकता।

इतनी ठंड में आप जो बाहर जाते,

अगले दो घण्टे तक कँपकँपाते।

इसलिए मैंने इन दोनों को मिलाया,

आपके लिए ये नया व्यंजन बनाया।

खाने से पहले धारणा मत बनाइए,

तनिक एक चम्मच तो चबाइए।

पेट में चूहे घमासान मचा रहे थे,

चावल देख पति ललचा रहे थे।

नुक्ताचीनी और नखरे छोड़कर,

खाया एक कौर चम्मच पकड़कर।

नये व्यंजन का नया स्वाद आया,

पत्नी का नवाचार बहुत भाया।

बोले अद्भुत संगम तुमने बनाया,

और मुझे ठण्ड से भी है बचाया।

तृप्त हूँ मैं ये नया व्यंजन खाकर,

और धन्य हूँ तुम-सी पत्नी पाकर।

पर एक बात तो बताओ प्रियतमा,

क्या नाम है इसका, क्या दूँ उपमा।

पत्नी बोली पहली बार इसे बनाया,

नाम इसका अभी कहाँ है रख पाया।

खिंच रही थी गैस दुविधा थी बड़ी,

इसलिए इसको बुलाएँगे खिचड़ी।

मित्रों इनके सामने जब समस्या हुई खड़ी,

न तो पति चिल्लाया न ही पत्नी लड़ी।

आपके समक्ष भी आए जब ऐसी घड़ी,

प्रेम से पकाइएगा कोई नयी खिचड़ी।

तो इस पूरी घटना का जो निकला सार,

उसे हम कह सकते हैं कुछ इस प्रकार।

कि पति-पत्नी में जब हो असीम प्यार,

तो हो जाता है खिचड़ी का आविष्कार।

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Strategic Alliances

  Strategic Alliances -  For any achievement gone need the right person on your team.  Sugriv was very keen on this. Very first Sugriva was ...