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Tuesday, 8 March 2022

भूतपूर्व सैनिक

क़ामर जहाँ अतीव सुन्दरी थी और उसने ने विमान में प्रवेश किया और अपनी सीट की तलाश में नजरें घुमाईं । उसने देखा कि उसकी सीट एक ऐसे व्यक्ति के बगल में है जो जिसके दोनों ही हाथ नहीं है। महिला को उस अपाहिज व्यक्ति के पास बैठने में झिझक हुई !

क़ामर जहाँ ने एयरहोस्टेस को कहा कि वह उसके लिए नियत सीट पर सुविधापूर्वक यात्रा नहीं कर पायेगी, क्योंकि साथ की सीट पर एक दोनों हाथ विहीन व्यक्ति बैठा हुआ है | उस सुन्दरी ने एयरहोस्टेस से सीट बदलने हेतु आग्रह किया |

असहज हुई एयरहोस्टेस ने पूछा, मैम क्या मुझे कारण बता सकती है?

'सुंदर' क़ामर जहाँ जवाब दिया: मैं ऐसे लोगों को पसंद नहीं करती। मैं ऐसे व्यक्ति के पास बैठकर यात्रा नहीं कर पाउंगी ।

दिखने में सभ्रांत और विनम्र प्रतीत होने वाली महिला के यह उद्गार सुनकर एयर हॉस्टेज़ अचंभित हो गई । सुन्दरी क़ामर जहाँ ने एक बार फिर एयरहोस्टेस से जोर देकर कहा कि मैं उस सीट पर नहीं बैठ सकती और मुझे कोई दूसरी सीट दे दी जाए ।

एयरहोस्टेस ने खाली सीट की तलाश में चारों ओर नजर घुमाई, पर कोई भी सीट खाली नहीं दिखी।

एयरहोस्टेस ने महिला से कहा कि मैडम इस इकोनोमी क्लास में कोई सीट रिक्त नहीं है, किन्तु यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखना हमारा दायित्व है, अतः मैं वायुयान के कप्तान से बात करती हूँ, कृपया तब तक थोडा धैर्य रखें । ऐसा कहकर होस्टेस कप्तान से बात करने चली गई |

कुछ समय बाद उसने लौट कर महिला को बताया,मोहतरमा ! आपको जो असुविधा हुई, उसके लिए बहुत खेद है | इस पूरे विमान में, केवल एक सीट खाली है और वह प्रथम श्रेणी में है। मैंने हमारी टीम से बात की और हमने एक असाधारण निर्णय लिया। एक यात्री को इकोनॉमी क्लास से प्रथम श्रेणी में भेजने का कार्य हमारी कंपनी के इतिहास में पहली बार हो रहा है  ।

'सुंदर' महिला अत्यंत प्रसन्न हो गई, किन्तु इसके पहले कि वह अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करती और एक शब्द भी बोल पाती  एयरहोस्टेस उस अपाहिज और दोनों हाथ विहीन व्यक्ति की ओर बढ़ गई और विनम्रता पूर्वक उनसे पूछा सर, क्या आप प्रथम श्रेणी में जा सकेंगे ? क्योंकि हम नहीं चाहते कि आप एक अशिष्ट यात्री के साथ यात्रा करने की त्रासदी भुगतें ।

यह सुनकर प्रत्येक यात्री ने ताली बजाकर इस निर्णय का स्वागत किया। वह अतीव सुन्दरी क़ामर जहाँ महिला तो अब शर्म से नजरें ही नहीं उठा पा रही थी।

तब उस अपाहिज व्यक्ति ने खड़े होकर कहा, मैं एक भूतपूर्व सैनिक हूँ और मैंने एक ऑपरेशन के दौरान कश्मीर सीमा पर हुए बम विस्फोट में अपने दोनों हाथ खोये थे । सबसे पहले, जब मैंने इन मोहतरमा जी की चर्चा सुनी, तब मैं सोच रहा था: मैंने भी किन लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली और अपने हाथ खोये ? लेकिन जब आप सभी की प्रतिक्रिया देखी तो अब अपने आप पर गर्व महसूस हो रहा है कि मैंने अपने देश और देशवासियों की खातिर अपने दोनों हाथ खोये । और इतना कह कर, वह प्रथम श्रेणी में चले गए।

'सुंदर' महिला क़ामर जहाँ पूरी तरह से शर्मिंदा होकर सर झुकाए सीट में गढ़ गई।

उस अतीव  सौंदर्य का भी कोई मूल्य नहीं अगर विचारों में उदारता न हो। 

मौसम

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आरंभ हो और अंत न हो

मन इतना भी स्वतंत्र न हो

व्यथित हो और शब्द न हो

मन इतना भी परतंत्र न हो

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विश्वास किसी पर इतना करो कि वो तुम्हे छलते समय खुद को दोषी समझे

और प्रेम किसी से इतना करो कि उसके मन में सदैव तुम्हें खोने का डर बना रहे !

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जब किसी में गुण दिखाई दे तो मन को कैमरा बना लिजिए!

और जब किसी में अवगुण दिखाई दे तो मन को आईना बना लिजिए।

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लोग कहते हैं जब कोई अपना दूर चला जाता है तो बड़ी तकलीफ होती है,

पर ज्यादा तकलीफ तो तब होती है जब कोई अपना पास होकर भी दूरियाँ बना ले !

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माली प्रतिदिन पौधों को पानी देते है मगर फल सिर्फ मौसम में ही आते हैं

इसीलिए प्रतिदिन बेहतर काम करना चाहिए। परिणाम समय पर जरूर मिलेगा।।

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माया की भूख माया का त्याग नहीं करने देती । यदि इसकी भूख मर गयी तो समझो मन मर गया ।

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रात सुबह का इंतज़ार नहीं करती,

खुशबु मौसम का इंतज़ार नहीं करती!

जो भी ख़ुशी मिले उसका आनंद लिया करो,,

क्योंकि जिंदगी वक़्त का इंतज़ार नहीं करती!

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बुरे वक़्त में कंधे पर रखा गया हाथ कामयाबी पर तालियों से ज्यादा मूल्यवान होता है

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सीधा-साधा गणित है अपना

जहां कदर नहीं वहां जाना नहीं,

जो पचता नहीं, वो खाना नहीं।

जो सत्य पर रूठे उसे, मनाना नहीं,

जो नज़रों से गिरे, उठाना नहीं।

मौसम सा जो बदले, दोस्त बनाना नहीं,

ये तकलीफें तो जिंदगी का हिस्सा हैं,

डटे रहना पर कभी घबराना नहीं

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Monday, 7 March 2022

निस्वार्थ

कुछ पास आयेंगे,

कुछ दूर जायेंगे।

बहुत कम लोग ही है,

जो निस्वार्थ रिश्ते निभायेंगे।।

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बाबा को सब एक बराबर,

अमीर है या गरीब है

निस्वार्थ भजन जो करता है,

वो बस थोड़ा करीब है

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मित्रता कोई स्वार्थ नहीं,बल्कि एक विश्वास है।

जहां सुख में हंसी, मज़ाक से लेकर, संकट में साथ देने की जिम्मेदारी होती है।

यहां झूठे वादे नहीं,बल्कि सच्ची कोशिशें की जाती हैं।

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सभी को साथ रखिये  

लेकिन - साथ में कभी  स्वार्थ मत रखिये

गलत सोच और गलत अंदाजा

इंसान को हर रिश्ते से

गुमराह कर देता है

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नि:स्वार्थ कर्म करते रहो,

जो भी होगा, अच्छा हीं होगा!

थोड़ा विलंब होगा,

पर सर्वश्रेष्ठ होगा!!

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कौन जाने क्या पाप , क्या पुण्य ,

बस किसी का दिल न दुखे

अपने स्वार्थ के लिए ,

बाकी सब कुदरत पर छोड़ दो

ना पैसा बड़ा ना पद बड़ा ।

मुसीबत में जो साथ खड़ा वो सबसे बड़ा ।।

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रिश्तो की सिलाई अगर

भावनाओ से हुई है

तो टूटना मुश्किल है

और अगर स्वार्थ से हुई है,

तो टिकना मुश्किल है

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Comment Jay Shree Ram

चारपाई

एक वृद्धा कि बेटी को कही जाना था इसलिए वह दोनों रेलवे स्टेशन गए और टिकट लेकर रेल की राह देखने लगे। वृद्धा ने देखा की वहा पर रेल टूटी हुई थी। 

गरीब वृद्धा सोचने लगी की कैसे किसी को इस बारे में बताऊ ताकि लोगो की जान बच सके। उसने आसपास देखा स्टेशन मास्टर भी कही नजर नहीं आ रहा था। टिकट खिड़की पर जाकर देखा तो कोई भी नहीं था। और रेल आने का समय हुए जा रहा था। 

फिर उस वृद्धा ने सोचा किसी तरह से अगर आग जलाई जाये तो रेल के ड्राइवर को रेल रोकनी पड़ेगी। उस जगह उसे ऐसा कुछ भी न मिला जिससे वो आग जला सके। फिर वह तेजीसे अपने घर गयी और अपनी चारपाई को लेकर स्टेशन पर आ गई। लकड़ी की चारपाई को उसने आग लगा दी जिससे रेल के ड्राइवर को रेल रोकनी पड़ी। 

ड्राइवर चिढ़ते हुई रेल से उतरा तो उसने देखा की रेल लाइन टूटी हुई है। उसने और सारे यात्रियों ने उस वृध्दा का धन्यवाद किया। फिर सभीने थोड़े थोड़े पैसे जमा करके चारपाई खरीदने के लिए उस वृद्धा को दिए। 

कहानी का सार ये की आप अगर चाहे तो उचित संसाधन न होते हुए भी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है। 

कहानी यहाँ तक पढ़ने के लिए धन्यवाद। इस कहानी को शेयर करें। जय श्री राम। 

भवन गढ़ ले चलो जी बलमा

वन्दे मातरम साथियों ! अभी आपके लिए राजस्थानी गीत के बोल लायी हूँ।  अगर आप राजस्थान से है तो कृपया इसे पढ़िए और आपकी भावनाये कमेंट करिये। राजस्थानी लोकगीत की बात ही बड़ी निराली है। 


हर्या हर्या गोबर पीली पीली माटी, तो लीप चलूंगी आंगणा

भवन गढ़ ले चलो जी बलमा

गोरे-गोरे मुखड़े पर पीली-पीली बेसर, पहरै चलूंगी बलमा

तीखे-तीखे नैणां में झीना-झीना सुरमा, तो सार चलूंगी बलमा

भवन गढ़ ले चलो जी बलमा

हरी-हरी साड़ी पर सुई-सुई चुनड़ी, तो ओढ़ चलूंगी बलमा

गोरी-गोरी बइयां मैं हरा-हरा चुड़ला, तो पहर चलूंगी बलमा

भवन गढ़ ले चलो जी बलमा

भूरी-भूरी पीण्डी में चोड़ी-चोड़ी पायल तो, पैहर चलूंगी बलमा

आगै-आगै बलमा पीछे-पीछे गोरी, तो गोद लीया ललना

भवन गढ़ ले चलो जी बलमा

मैया के भवन पर भीड़ हुई, तो बीछड़ गया री बलमा

सवा ए मण की मैया करूं ए कढ़ाई, तो जै घर आवै बलमा

भवन गढ़ ले चलो जी बलमा

सवा ए तोला गा मैया छत्तर चढ़ाऊँ, तो जै घर आवै बलमा

सवा ए गज की मैया ध्वजा ये चढ़ाऊं, तो जै घर आवै बलमा

भवन गढ़ ले चलो जी बलमा

मैया के भवन पर छीड़ हुई, तो आपे ही आए बलमा

पीछे मुड़ के देखण लागी, तो पास खड़े री बलमा

भवन गढ़ ले चलो जी बलमा

सवा ए सेरकी मैया करूँ ए कढ़ाई, तो आपे ही आए बलमा

सवा ए माषा का मैया छत्तर चढ़ाऊँ, तो आपे ही आए बलमा

भवन गढ़ ले चलो जी बलमा

करी ए कढ़ाई मेरा कुणबा खाई, तो भूल गई बामणां

छोरा बी खाई मेरी छोरियाँ बी खाई, तो एक पीण्डी बामणां

भवन गढ़ ले चलो जी बलमा


यहाँ तक पढ़ने के लिए धन्यवाद राजस्थानी, मारवाड़ी भाषा बोलने वाले आपके मित्रो के साथ इस गीत को शेयर करिये। 

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Candle of Hope

 

Vande Matram! I am here with a moral story that you must give to your child for recitation. It may possible that you have read this story a lot of times. But still, it is good for reading. And if your child reads this in front of you, there will be a chance of good communication with him/her where you will create a moment of memory with your angel.


In a room, 4 candles were burning. The ambiance was so soft that you can hear them talking. The first candle said, 'I am peace. Nobody can keep me lit. I believe that I will go out.' It is flame rapidly diminishes and goes out perfectly.

The second one says, 'I am faith. So most of us are indispensable, so it doesn't make any sense to lit me longer.'

The third one says, 'I am love, I have no strength to be lit. People put me aside and don't understand my importance. They even forget to love who are closest to them.' Making go out it suddenly goes out. 

And then a child came and saw three candles were not burning. 'Why are you not burning you are supposed to lit till the end.'

The child started crying, then the fourth candle said, 'Don't worry I am lite we can lite all the candles again. I am the hope. With a smile on her face, the child took the fourth candle and started to light all the candles.


Moral, Don't take the hope out of your mind. Hope can do anything. The main, cause of brain problems is losing hope.


Thanks for reading till the end. Please share this story. Write the moment of hope in your life. Your story may become the next moral story on this blog.

हनुमानजी की बिदाई

वन्दे मातरम साथियों ! आज फिरसे आपके साथ कुछ पक्तियाँ साझा कर रही हु। रामकथा के समाप्ती के समय इसे पढ़ना चाहिए। 

  

जय जय राजा रामकी। जय जय लक्ष्मण बलवान।

जय कपीस सुग्रीव की। जय अंगद हनुमान।

जय जय काग भुशुंड की। जय गुरु उमा महेश।

जय जय मुनि भरद्वाजकी। जय तुलसी अवधेश।

राम लखन सिय जानकी। सदा करी कल्याण।

रामायण मम ह्रदय बसो। बीदा होय हनुमान।

पर्भु संग कहियो दंडवत। तुमही कहु कर जोर।

बार बार रघुनाथ कहो। सुदी कराओ मोर।


अगर आपने यह अच्छे से पढ़ लिए है तो एक बार जय श्री राम कमेंट करिये और इसे सभी रामभक्तों के साथ शेयर करिये। 

धन्यवाद!

Strategic Alliances

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