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Sunday, 13 October 2019

रव्याची इडली

इडली सगळ्यात हलका फुल्का नाश्त्याचा प्रकार आहे - आणि झटपट इडली साठी हि रेसिपी तुमच्या नक्की कामी येईल . तत्पूर्वी हा ब्लोग शेयर करा .

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Image credit: लजीज खाना

साहित्य:
अडीच कप बारीक रवा
२ टेबल स्पून तेल
४ कप पातळ ताक
मीठ - चवीनुसार

फोडणीसाठी 
तेल
मोहरी
हिंग
कढीलिंबाचा पाला
उडदाची डाळ
हिरवी मिरची - देठापासून टोकापर्यंत चिरून दोन तुकडे करून - १-२ मिरच्या
काजू तुकडे
खोबरे खीस
तीळ

कृती 
तेलावर रवा भाजा .
कोमट झाल्यावरताक व मीठ घालून अर्धा तास ठेवा .
फोडणी घाला .
पीठ घट्ट वाटल्यास थोडे पाणी टाका.
नेहमीप्रमाणे इडली बनवा.
सांबर आणि चटणी सोबत वाढा .


धन्यवाद . कृपया subscribe करा व शेयर करा.

साहित्य भाषा

नमस्ते दोस्तों आज आप साहित्य भाषा के बारे में पड़ेंगे। 

आम बोलचाल में साहित्य भाषा का प्रयोग काम ही होता है। पर यह भाषा व्याकरण की  शुद्ध, अलंकृत और परिमार्जित है। यह भाषा का मानक रूप है। इसमें ही साहित्य की रचना होती है। कविता, कहानी, नाटक, निबंध, आलोचना, एवं उपन्यास अदि साहित्य की विभिन्न विधियां की रचना साहित्य भाषा से ही हटी है। 

धन्यवाद पढ़ने लिए।   

भाषा

नमस्ते दोस्तों आज हम भाषा के बारे में जानकारी  पढ़ेंगे।

१. मनुष्य का स्वाभाव है कि वह अपने भाव व विचारों को किसी-न-किसी पहुँचाना चाहता है। 
२. इन भावों  विचारों को दूसरों  पहुंचना संभव नहीं है। पर सभ्यता के विकास-क्रम से मनुष्य के भाव-लोक में निरंतर फैलाव आता गया है और भावाभिव्यक्त्ति के लिए मनुष्य ने भाषा का अविष्कार किया, ऐसा माँ जाता है। 
३. भाषा वह माध्यम है जिनसे मनुष्य पढ़कर, लिखकर, बोलकर, अदि सुनकर अपने भावों को दूसरों तक पहुँचाता तथा दूसरे के भावों को ग्रहण करता है। 
४.मनुष्य ने मुँह से जो उच्चिरत ध्वनियों में आवश्यक तोड़-जोड़ उनसे भाषा का मौखिक रूप बना। हजारों सालों तक भाषा मौखिक रूप में ही फलती-फूलती रही। 
५. विकास-क्रम में ध्वनि-संकेतों विकास हुआ और भाषा का का लिखित रूप का निर्माण हुआ। 
६. भाषा का निरंतर विकास हुआ और अलग-अलग समय में अलग-अलग भाषाए बनती रही। जैसे संस्कृत, पाली, प्राकृत, हिंदी अलग-अलग समय में बानी गई भाषाए है। 

धन्यवाद पढ़ने के लिए। 
             

दूसरों की हालत को समझकर फैसले ले

नमस्ते मेरे वाचको। भगवान की कृपा आप सभीपर बरस ही रही होंगी ये विश्वास है मुझे। आज आपके लिए फिरसे एक नई कहानी लायी हु। ए कहनी है गांधीजी और उस जमाने के बम्बई के हीरो के व्यापारी रायचंदजी की। अपने संस्मरण में गांधीजी ने रायचंदजी को अपना गुरु बताया हुआ है।

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Image credit: Nojoto

रायचंदजी भाईं पहले बंबई में जवाहरात का व्यापार करते थे।
उन्होंने एक व्यापारी से सौदा किया । यह निश्चित हो गया कि अमुक तिथी तक, अमुक भाव में इतना जवाहरात वह व्यापारी देगा। व्यापारी ने रायचंद भाई के साथ लिखा-पढी करली। यह संयोग की बात थी कि जवाहरात के मूल्य बढ़ने लगे ओर इतने अधिक बढ़ गए कि यदि रायचंद भाई को उनके जवाहरात वह व्यापारी को दे तो उसे इतना घाटा होता कि उसका स्वयं का घर भी नीलाम को जाता।
जव रायचंद भाई को जवाहरात के वर्तमान बाजार भाव का पता लगा तो वे उस व्यापारी की दुकान पे पहुँचे।
उन्हें देखते ही व्यापारी  बोला, "मैं आपके सौदे के लिये स्वयं चिंतित हु।"
रायचंद भाई बोले, "तुम्हे जब चिंता लग गईं तो मुझे भी होनी चाहिए। दोनो की चिंता का कारण यह  लिखा पढ़ी हैं । इसे समाप्त कर दे तो दोनों की चिंता खत्म हो जाएगी।
रायचंद भाई ने लिखा पढ़ी के कागज का फाडते हुए कहा, " इस लिखा पढ़ी से तुम बंध गए थे। बाजार भाव बढ़ने के कारण मेरा चालीस पचास हजार रुपया तुम पर लेना हो गया था। किन्तु मैं तुम्हारी परिस्थिती जनता हूँ। रायचंद दूध पी सकता है, खून नही पी सकता।"
"आप मनुष्य नही देवता है।" यह कह कर व्यापारी रायचंदजी के चरणों मे गिर पड़ा।
अपना कुछ रुपयों का मुनाफा भूलकर रायचंदजी ने उस व्यापारी की परिस्थिती को समझा और उसे लिखा पढ़ी की शर्तों से मुक्त कर दिया और वे पूजनीय हो गए।
आज का समाज अमनुष्यता की और जाने की वजह यही है कि मनुष्य दूसरे की हालत समझना ही नही चाहता केवल अपना ही मुनाफा देखता है। अगर आप पूजनीय बनना चाहते हो तो दूसरों की हालत को समझकर फैसले लेने की कोशिश करें।
अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद। अगर आपको कहानी पसंद आई हो और आपने अपने जीवन मे दूसरे के हालात समझकर अगर कोई भी फैसला किया हो तो जरूर कमेंट करके बताये और इस कहानी को अपने सभी सोशल ग्रुप्स में शेयर करें।

What were the ways the grains were used in the past?

Hello friends in this article you are going to read about grains.

1. In past grains were stored in the clay pots, baskets or in pit houses.

2. Grains were used as seeds.

3. Grains were used as food.

4. Grains were used as gifts to others.

5. It was used as a medium of exchange in barter system(In trade, barter is a system of exchange where participants in a transaction directly exchange goods or services for other goods or services without using a medium of exchange, such as money.) 

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Who are known as archeologists

Hello friends in this article you are going to read about archeologists.

1. Archeologists are the historians who study objects made and used in past.

2. They study remains of buildings made up of stone and bricks, paintings and sculptures.

3. They also find tools, weapons, pots, ornaments and coins.

4. They find some objects of stone brick and baked clay.

5. They also find bones of animals, fishes and birds to find out what people eat in the past.

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Pit houses

Hello friends in this article you are going to read about pit houses.

1.Pit houses are type of underground houses.

2. They have steps leading into the houses.

3. They were dug under the ground.

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