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Thursday, 21 August 2014

बज बारस की ओगड़ा की कहानी


बज बारस की ओगड़ा की कहानी 


एक गाव हो। बठ अकाल पड्यो हो। गावको सावकार तलाव बांध्यो पर तलाव न पानी लाग्यो कोणी। जरा पंडितजी बोल्या ," शेठ जी थान दो पोता ह। एक पोतो तलाव म न्हाक देओ तो तलाव न पानी लागसी। " जरा सावकार बिचार क-यो एक पोतो जाइ पर पूरा गावन पानी मिली। पर बहुन क्यान बतानु।

सावकार बहु न बोल्यो, "बहूजी थाका पीर को बुलावो आयो ह। थे छोटा हंसराज न लेयर जावो बड़ा बंसराजन अठेही रखो।" बहु हंसराज न लेयर पीर गयी। अटन सावकार तलाव का किनारा घणो बड़ो जिग रच्यो। होमहवन क-यो। बंसराज न तलाव म गैर दियो।  जना बहुको भाई बिन बोल्यो , " थारा घर आज होम हवन चाल्या ह। जिग रच्या ह। गाव गावसु लोग बुलाया ह। थन कोणी बुलायो। " भू बोली, "थान बुलायो ह। मन म्हारा घर जावन बुलावो थोड़ी लगीसी। " यान बोलर बहु आपरा घर जावन निकली।

घर पूग्या बाद बहुन देखर  सासु सुसरा डरन लाग्या। अब बहु पूछी जना काई केवणु यो सोचन लाग्या। सासु बहुन बोली , "बहूजी चलो आज बज बारस ह। चालो तळावकी पूजा करा। " दोई जन्या तलाव पर गयी। पूजा करी। फेर सासु बोली, "बहूजी आज थे चुन्दडी सु तलाव की कोर खाण्डि करो। " बहु बोली, "म्हे कोणी म्हारा तो हंसराज बंसराज ह। " सासु बोली, "आज म बोलू जिको करो। " बहु सासुकी बात सुनी और चून्दडिसु तळावकी कोर खाण्डि कारन बोली, "आओ रे म्हारा हंसराज, आओ रे म्हारा बंसराज लाडू उठाओ। " सासु दरबा लगी। बिचार करबा लागी, "अब बंसराज कठासु आई। "  भगवान की प्रार्थना करबा लागी। जित्ताम बंसराज तलावमायसु झरझरता केसासु निकल्यो। यो देखर बहु पूछी, "यो काई ह सासुजी ?" जना सासु सगळी हकीगत बताई।

हे भगवान सासुको सात राख्यो ब्यान सगलाको राखज्यो। अधुरिकी पूरी करज्यो , पूरी न परवान करज्यो। भूल चूक माफ़ करज्यो।



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बज बारस की गव्हाळ्या मूंगाल्या की कहानी

बज बारस की गव्हाळ्या मूंगाल्या की कहानी 





एक सासु बवा ही। सासु रोज गायन चरावन वन म ले जावती ही। एक दिन बज बारस ही। दोनु सासु बवा गाय गोरा की पूजा करी। सासु बहुन बोली , "बहूजी गव्हाळ्यो मूंगाल्यो रांधर रख दीज्यो। " और बन म गाय ले कर चली गयी।

गायका बछड़ा को नाव गव्हाळ्यो मूंगल्यो थो। बहु डरती डरती बछड़ा न बिंदा-यो और उबालबान रख दियो।

शामका सासु घर आई और बोली, "बहूजी बछडान छोड़ द्योव। आज बारस ह। पेली बछड़ा न पिलायर पच आपा जिमा। बहु घनी घबरायगी और भगवान की प्रार्थना करी ," हे भगवान आज म्हारो सात राखज्यो। "

बित्ताम मटका मायरो गव्हाळ्यो मूंगल्यो जीवतो हुयो और मटकी फोड़कर बार आयो।  मटकी रो मुंडो बिक गळां म अटक गयो हो। यो सब देखर सासु पूछ्यो , "बहूजी यो काई ह। " जना बहु सगळी हकीगत बताई। बा दिनसु लुगाया बज बारस न गहु मूंग खव नहीं। कोई  चीज बन्दार नहीं। गाय गोरा की पूजा कर।

हे भगवान ज्यान बहुको सात राख्यो ब्यान सबको राखज्यो। घटती की पूरी, अधुरिकी पूरी करज्यो। सवग भाग अमर राखज्यो।



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बज बारस कहानी - शेठानी को टाबर

बज बारस  कहानी - शेठानी को टाबर  


भादवा को महीनो आयो। बजबारस का दिन गायकी पूजा करण का लिय स्वर्ग की मोगण्या (अप्सरा) धरती पर आई। ब्यान एक गाय चरति हुई दिखी तो बा सगळी जन्या  बिकी पूजा करबा लागि। आगसु पूजा कर तो शिंग मार  लारसु पूजा कर तो लाथ मार। गाय पूजा करबा देव कोणी यो देखकर मोगण्या पूछी , "हे गौ  माता , म्हे थारी पूजा करा और तू म्हान मार। यान क्यूँ ?" जरा गाय बोली , "म्हार बछड़ो कोणी। थे म्हारी पूजा क्यान करो। गाय का साथे बछडाकी पूजा करनी लाग। "

जरा स्वर्ग की मान्य दरभको बछड़ो बनायो और गाय कण रख दियो। गाय कण रखताही बो बछड़ो जीवतो हुयग्यो और गायको दूध चूट चुट पिवण लाग्यो। मोगण्या गौ माताकी पूजा करी और स्वर्ग वापस चली गयी। गाय आपरा बछड़ा न लेयर घर गई। 

गायका साथे बछडान देखताही बिक मालकिन न गुस्सो आयो और बा रिसो बळबा लागी। मालकिन गायन समय पर चारो पानी नहीं देवती , पेट भर खावण नहीं देवती। जरा एक दिन गाय बिका मालकिन न पूछी , "शेठानीजी म्हारी काई गलती हुई ? थे क्यू रिसो बळो ? " जना मालकिन बोली, "थारा लिय बछड़ो लेने आयगी पर मन टाबर कोणी ई बात को काई उपाय कोणी करी। जीरा लिय मन रिस आई ह। " गाय बोली , "शेठानीजी थे रिसो माटी बळो अगली साल थान बज बारस का दिन टाबर ले देऊ। "

अगला साल बज बारस आई। गाय जंगलम चरबान गई। स्वर्ग की मोगण्या आई और बी गाय की पूजा करबा लागी। गाय आगसु पूजा कर तो शिंग मार , लारसु पूजा कर तो लाथ मार। मोगण्या बोली, "हे गोमाता, लारली साल थान बछड़ो दियो। अब थे म्हान पूजा करबा देओ। " जना गाय  बोली," म्हारा मालकिन न टाबर कोणी। थे मन एक टाबर देवो तो पूजा करबा देऊ। " मोगण्या दरभको टाबर बनाओ और बिन दरभका झूला म रख्यो। संजीवनी को छिटो डेयर टाबर जीवतो क-यो। गाय पूजा करबा दी। मोगण्या झूलो लेयर गायका शिंग न बाँध दी और स्वर्ग चली गयी। 

गाय घर आई और मालकिन न बोली ," ये ल्यो शेठणीजी , थाका लिय टाबर लायो। बेटो ह। " जना मालकिन न घणो आनंद हुयो। बाजा गाजा सु गाय और टाबर को स्वागत हुयो। 

हे गौ माता मालकिन न बेटो दियो ब्यान सगळां न दीजो। घटती की पूरी करजो। भूल्यो चुक्यो माफ़ करज्यो। सवग भाग अमर रखज्यो। 



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पथवारी की कहानी


पथवारी की कहानी 




दो भाई बेन हां। उली तीर बेन रेवती पेली तीर भाई रेवतो। बेंको नेम हो रोज भाई को मुंडो देखणु। बेन रोज भाई का घर जावती। जाता जाता रास्ताम बा चार पांच कंकर भेळा करती। दूध - दही सु बिन सींचती और एक जगहपर रखकर केवती , "हे पथवारी माता म्हारा भाई की बेलबाड़ी बढबा दे। और पछ भाई का घर जावती। भाई को मुंडो देखर वापस आवति।

एक दिन भाई बोल्यो , " रोज बेन आव। आज म जावु। " और भाई निकल पड्यो। रास्ताम पथवारी को बड़ो सरो डूंगर भाई न दिख्यो। भाई सोच्यो ," म्हारा बेन न आवता जावता कित्ती तकलीफ होती होशी। " जिको बो पथवारी माताका सब कंकर बिखेर देव।



इश्यो का-यासु भाई को पेट दुखबा लाग और बो हाय हाय  करतो घर चले जाव। भाई आपरा  बेन रा लिय संदेशो भेज , "थारा भाई को पेट घणो दुख ह। भाई को मुंडो देखनु होशी तो जल्दी आ। " बेन घर सु निकल। रस्ताम पथवारी बिखरी  पड़ी ही। बेन पूरी पथवारी भेळी करी। बेन ज्यान ज्यान पथवारी भेळी  कर ब्यान  ब्यान भाई को पेट दुखणु काम हुव। पूरी पथवारी भेळी हुया बाद भाई को पेट दुखणु बंद हुयग्यो। सारी  पथवारी  दूध दही सु सीची  और बोली, " हे पथवारी माता म्हारा भाई की बेलबाड़ी बढबा  दे। " पछ बा भाई का घर कण निकली।

बेन घर आया फेर भाई पूछ्यो , "बेन म्हारो इत्तो पेट दुख्यो और तू अब आव ह। " जना बेन बोली, "भाई, म तो निकली घना जल्दी ही। पर रास्तम पथवारी को डूंगर हो जिको कोई बिखेर दियो हो। जिको भेळी करती आई जिकाऊ इत्ती देर हुई। " जना भाई बोल्यो , "पथवारी को डूंगर मच बिख-यो हो। " बेन बोली, "तू बिख-यो जिको दुःख पायो। म तो थारी बेलबाड़ी बढबा का लिय पथवारी रोज सींचती और एक जगह जमा कारण रखती। "

हे पथवारी माँ , भाई को पेट दुख्यो ब्यान कुनको मति दुखन दीज्यो। थान सिच जिकाको चोखो करज्यो। भूली चुकी माफ़ करज्यो।




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