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Thursday, 7 April 2022

गौ माता

 पहली कहानी -

वह समय था 19th एवम 20th सेंचुरी का। अर्थात 1800 से लेकर 1999 का समय। भारत में आक्रमणकारी आतताइयों के अलावा कोई और भी था जिसने त्राहिमाम मचा रखा था। वैसे तो यह त्राहिमाम हजारों वर्षों से मचा हुआ था किंतु सिर्फ 20th सेंचुरी में 300 मिलियन अर्थात 30 करोड़ लोग इस त्राहिमाम से परलोक सिधार चुके थे। क्या था यह त्राहिमाम। यह था एक छोटा सा वायरस। नाक और गले के माध्यम से एक अदृश्य वायरस मानव के शरीर में घुस जाता था। फेफड़ों में जाकर फ्लू और बुखार जैसे लक्षण आते थे, फिर पूरा शरीर फफोलो से भर जाता था। गॉव के लोग इस महामारी को बड़ी माता कहते थे और वैज्ञानिक लोग चेचक। चेचक होते ही 10 में से 4 लोगों को मरना ही होता था। समय बीत रहा था विश्व भर में बेहिसाब लोग चेचक से मर रहे थे किन्तु भारत में लोगों का एक समूह था जिनको चेचक होता ही नहीं था और यह था भारत के गौ पालक ग्वालों का समूह।

ये ग्वाले दिन भर गौमाता के सानिध्य में रहते, उनको चराते, नहलाते दुहते। इस समूह से बाहर जब लोग बड़ी माता से मर रहे होते, इन ग्वालों को बस थोड़ा था बुखार होता, दो चार पिम्पल्स और वो ठीक हो जाते।

लंबी कथा को शार्ट करता हूँ, ग्वालों की इस महामारी बड़ी माता से रक्षा और कोई नहीं, गाय माता ही कर रही थी। होता यह था कि बड़ी माता का यह खतरनाक वायरस गाय के शरीर में रहने वाले गाय के वरिओला नामक वायरस के समक्ष घुटने टेक देता था और गाय को तो बड़ी माता से कुछ होता ही नहीं था, वरन गाय के सानिध्य में रहने वाले मनुष्य भी बड़ी माता से सुरक्षित हो जाते थे।

भारत के ग्वालों के इस अनुभव को एडवर्ड जेनर नाम के एक अंग्रेज वैज्ञानिक ने कैश किया और गाय के शरीर से इसी वैरियोला वायरस के पीप को निकाल कर इसी पीप को मनुष्यों में देना शुरू कर दिया ताकि वो लोग जो गाय के सानिध्य में नहीं रहते उनको भी गाय के इस चमत्कारी श्राव के द्वारा बड़ी माता से बचाया जा सके। हजारों वर्षों से धरती पर त्राहिमाम मचाती चेचक अर्थात बड़ी माता का निदान विश्व को मिल गया था। यही चेचक की वैक्सीन थी और विश्व की प्रथम वैक्सीन भी। इस वैक्सीन को खोजने का श्रेय मिला अंग्रेज एडवर्ड जेनर को, लोग भारत के ग्वालों को भी भूल गए और गाय को भी। यह कथा कभी बताने की जरूरत नहीं समझी गई, किन्तु कथा का सारांश यह है कि हजारो वर्षो की महामारी का इलाज मिला गौं माता से।

अब दूसरी कथा। यह कथा बस कुछ वर्ष पहले की है। मात्र 3 वर्ष पहले की। गूगल कर लीजिए तथ्य और डेट मिल जाएगी।

वैज्ञानिको के एक समूह ने सोचा कि अगर खतरनाक HIV अर्थात एड्स के वायरस को गाय को दिया जाए तो क्या होगा?? वैज्ञानिको ने HIV का वायरस गाय के शरीर में प्रविष्ट कराया और यह क्या! गाय को एड्स होने के बजाय एड्स का वह वायरस गाय माता के शरीर में नष्ट हो गया। नष्ट ही नहीं हुआ वरन उसके खिलाफ गाय के खून में एक विशेष एंटीबाडी भी बन गयी जो HiV वायरस को मार डालने में सक्षम थी। विश्व के सबके बड़े विज्ञान के जर्नल नेचर में दो वर्ष पहले यह खोज छपी कि HIV की वैक्सीन सम्भव है तो सिर्फ गाय के सहारे। ज्ञात हो कि दो तीन दशकों तक हजारो करोड़ खर्च करने के बाद भी आज तक विश्व का कोई भी वैज्ञानिक HiV की वैक्सीन नहीं बना पाया था। अब गाय माता के कारण यह सम्भव होने के कगार पर है।

अब तीसरी कथा। यह कथा है गाय के माध्यम से वर्तमान महामारी कोरोना का इलाज। यह फेसबुक पोस्ट है कोई किताब या विज्ञान का जर्नल नहीं। वैज्ञानिक लोग गूगल कर लेना, पता चल जाएगा।

South Dakota की SAb Biotherapeutics नामक कंपनी ने गाय के माध्यम से कोरोनाकी वैक्सीन बनाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। बड़ी सफलता भी मिली है। देखना यह है कि दुनिया के ठेकेदार इस अद्भुत खोज को मान्यता देते हैं कि नहीं। इतिहास तो कहता है कि ये ढोंगी मर जायेंगे, किन्तु गौ माता को मान्यता नहीं देंगे।

यूँ ही माता नहीं कहा जाता गाय को। आज धरती के ऊपर संकट आया है तो माता के पास जाकर तो देखो। माता का सानिध्य पाकर तो देखो। माता को सिर से पैर तक छूकर नमन करके तो देखो, माता को प्यार से चूमो तो सही, कौन सा संकट होगा जो तुमको छू सकेगा !!

पहले दिन से जब मैंने हल्दी का निदान आप सभी को बताया था (जो आज भी सार्थक और कारगर है) उसी दिन से सभी को संकेत दे रहा हूँ कि गाय का सानिध्य करो। गाय को रोटी दो। प्यासी हो तो पानी पिला दो । इस बहाने दो पल आपको गाय का सानिध्य तो प्राप्त होगा। इसी पल भर के सानिध्य से तुम्हारा कल्याण हो जाएगा।

समझदार को इशारा काफी। वर्तमान महामारी से बचना है तो सौ साल पुराने चेचक के इतिहास और निदान से सीख लेनी होगी। गाय को आप लोग भूल गए हैं, यह विस्मृति ही वर्तमान कष्टों का कारण है। कभी इन आवारा घूमती भूखी प्यासी कटती गायों की आंखों को पढ़ना, कहती मिलेंगी कि हे मेरे पुत्रो, तुम व्यथित क्यों हो, मेरे पास आओ, मुझे काट लेना, खा जाना, मुझी को खाकर कर लेना अपनी भूख शांत, किन्तु उससे पहले बस दो पल मेरे साथ बिताओ तो सही व्यथित क्यों हो, मैं हूँ ना ।।

मेरा कार्य पूर्ण हुआ। गाय सबकी है। किंतु पल दो पल का सानिध्य आपको स्वयं  तलाशना होगा। आगे आपका भाग्य।

ॐ श्री हरि। जय गऊ माता। जय माँ गायत्री 

Wednesday, 6 April 2022

भक्ति योग

 संसार के साथ या स्त्री पुत्र मित्र आदि के साथ जो संबंध है, वह माना हुआ संबंध है, जो नाशवान है, अर्थात शरीर के रहते ही यह संबंध रहते हैं, और मरने पर मिट जाते हैं, लेकिन परमात्मा से संबंध जन्म लेने के पहले और मरने के बाद भी रहता है, जीव का परमात्मा से सनातन संबंध है,

विचार कीजिए--- मरने के बाद धन यही रह जाएगा, उसे कमाने के लिए जो पाप किए हैं वे साथ जाएंगे, और उनसे परलोक में दुर्गति होगी,

मरने के बाद धन तिजोरी में रह जाता है, पशु जहां-तहां बंधे रह जाते हैं, स्त्री घर के दरवाजे पर ही साथ छोड़ देती है, लोग श्मशान तक ही जाते हैं, और शरीर भी चिता तक ही साथ रहता है, उसके बाद परलोक के मार्ग में केवल धर्म ही जीव के साथ रह जाता है,

विचार कीजिए---- जिन वस्तुओं को हम अपना मानते हैं, वह सदा साथ नहीं रहेंगी, पर उनका संबंध है वह बंधन रह जाएगा, जो जन्म जन्मांतर तक साथ रहेगा,

इसलिए साधक को चाहिए कि वह शरीर को या तो संसार अर्पण कर दे जो कर्म योग है

चाहे अपने को शरीर एवं संसार से सर्वथा अलग कर ले जो ज्ञान योग है

और चाहे अपको भगवान के अर्पण कर दे जो भक्ति योग है 

Tuesday, 5 April 2022

धातु के बर्तन में भोजन - लाभ और हानि

सोना

सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

चाँदी

चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है  इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

कांसा

काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में  शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

तांबा

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

पीतल

पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

लोहा

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से  शरीर  की  शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और  पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

स्टील

स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से इसलिए नुक्सान नहीं होता है इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी  नहीं पहुँचता।

एलुमिनियम

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

मिट्टी

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।

Monday, 4 April 2022

द्वादशजुोतिर्लिङ्गानि

वन्दे मातरम्! महादेव की आराधना करना बड़े सौभाग्य की बात है| इसीलिए आज आपके लिए बारह ज्योतिर्लिंग का स्तोत्र लेकर आई हु| कृपया पढिये| मुखोद्गत करिए| और सबके साथ साझा करिए| 


सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।

उज्जयिन्यां महाकालमोङ्काराम मलेश्वरम् ॥ १॥

 

परल्यां वैजनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।

सेतुबन्धे तू रामेशं नागेशं दारुकावने ॥ २ ॥

 

वाराणस्यां तू विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।

हिमालये तू केदारं घृष्णेशं च शिवालये ॥ ३॥

 

एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायंप्रातः पठेन्नरः।

सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥ ४॥


एक बार महादेवजी का जयकारा लगा दीजिये सभी भक्तगण |


Sunday, 3 April 2022

आसाबाडी

 जय श्री कृष्ण सखियों! मारवाड़ी त्यौहार हो और कहानियाँ न हो ऐसा नहीं हो सकता। मारवाड़ी त्यौहार  कथाओं के बाद आसाबाड़ी को बोला जाता है जिससे कथा का पुण्य मिलता है। कृपया इसे हर कथा के बाद पढ़े। 



सब कहानियाँ का आखिर म केवणु।


आसाबाडी आसाबाड़ी ज्याम बैठी कन्या कुमारी।

कन्या कुमारी कई शिवर ?

शीतला माता की कहानी शिवर। (शीतला माता की जगह पर उक्त त्यौहार को नाम लेवनु। )

बिनायकजी की कहानी शिवर।

लपेश्री तपश्री की कहानी शिवर।

बिश्राम देवता की कहानी शिवर।

आ शिवरायुं काई हुव?

अन्न हुव, धन हुव, लाभ हुव , लिछमी हुव।

बिछुड़यान मेळो हुव।

निपुत्र्यान पुत्र हुव।

रोग्या को रोग जाव।

बिंदरा बिन्द म एक सखी केवती , सगळी सुनती।

ज्याकी मन इच्छा पूर्ण हुई ब्यान सगलाकी इच्छा पूर्ण करज्यो।


पढ़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको इससे मदत हुई हो तो एक बार कमेंट में जय श्री कृष्ण कह दीजिये और इस ब्लॉग को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।


Saturday, 2 April 2022

Upvas ki jalebi

 Jay Annapurna Maa! You are welcomed on this blog for Vegetarian recipes. Here is a recipe for fasting sweet. Please try it.



Ingredients

For syrup

400 gram sugar, 1 cup water, 2 to 3 drops of saffron essence, a pinch of cardamom powder.

For dough

250 grams boiled peeled and mashed potatoes, 125 grams fresh whipped curd, 125 gram arrowroot powder, 2 to 3 drops food grade orange colour and ghee for deep frying.


Method

For syrup

1. Boil sugar and water together.

2. Keep stirring till one thread consistency is done. 

3. Put off the fire add saffron essence and cardamom powder. Mix well. 

Note: If you are not having saffron essence then you can try this: Take 2-3 tsp Luke warm water and soak 4-5 saffron leaves for half hour. And you can add this to your sugar syrup.

For Dough

Add knead well mashed potatoes, curd and arrowroot powder to make a smooth dough. The consistency of dough must be like that of pakodi batter.

Method

1. Take a muslin cloth or jalebi maker, add the dough in it. If you are using muslin cloth, make a small hole at the bottom of it and then add the dough by keeping the cloth in a bowl. After adding the dough in it knot it at top.

2. Heat ghee in a deep frying pan on low flame. Protrude the dough either through jalebi maker or muslin cloth, then put the jalebi shape with the dough in ghee. Slowly fry jalebis and they are ready.

3. Take away all the jalebis from the pan and keep them aside in a fine strainer so that extra ghee will be strained away from the jalebis. Keep the strainer in a bowl so that you can use that ghee again for frying.

4. Dip the jalebis the sugar syrup for a minute and take away from it in a serving bowl and the jalebis are ready. 

Thanks for trying this recipe. Support me by sharing this recipe with others.

Friday, 1 April 2022

अम्बे माँ की आरती

जय माता दी! नवरात्र हो या कोई भी दिन माता की भक्ति मन को शांति ही देती है| इसके लिए अम्बे माँ की आरती खास आपके लिए| खुद पढ़िए, गाइए - मन को आनंद मिलेगा| 


जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुम को निस दिन ध्यावत

मैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ।| जय अम्बे गौरी ॥

 

माँग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद को |मैया टीको मृगमद को

उज्ज्वल से दो नैना चन्द्रवदन नीको|| जय अम्बे गौरी ॥

 

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर साजे| मैया रक्ताम्बर साजे

रक्त पुष्प गले माला कण्ठ हार साजे|| जय अम्बे गौरी ॥

 

केहरि वाहन राजत खड्ग कृपाण धारी| मैया खड्ग कृपाण धारी

सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी|| जय अम्बे गौरी ॥

 

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती| मैया नासाग्रे मोती

कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति|| जय अम्बे गौरी ॥

 

शम्भु निशम्भु बिडारे महिषासुर घाती| मैया महिषासुर घाती

धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती|| जय अम्बे गौरी ॥

 

चण्ड मुण्ड शोणित बीज हरे| मैया शोणित बीज हरे

मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे|| जय अम्बे गौरी ॥

 

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी| मैया तुम कमला रानी

आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी|| जय अम्बे गौरी ॥

 

चौंसठ योगिन गावत नृत्य करत भैरों| मैया नृत्य करत भैरों

बाजत ताल मृदंग और बाजत डमरू|| जय अम्बे गौरी ॥

 

तुम हो जग की माता तुम ही हो भर्ता| मैया तुम ही हो भर्ता

भक्तन की दुख हर्ता सुख सम्पति कर्ता|| जय अम्बे गौरी ॥

 

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी| मैया वर मुद्रा धारी

मन वाँछित फल पावत देवता नर नारी|| जय अम्बे गौरी ॥

 

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती| मैया अगर कपूर बाती

माल केतु में राजत कोटि रतन ज्योती|| बोलो जय अम्बे गौरी ॥

 

माँ अम्बे की आरती जो कोई नर गावे| मैया जो कोई नर गावे

कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे|| जय अम्बे गौरी ॥

 

देवी वन्दना

 

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता|

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||


यहाँ तक पढने के लिए धन्यवाद ! एकबार माता का जयकारा कमेंट करिए और इसे सबके साथ शेयर करिए |

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