एक फ़क़ीर था। वह हर रोज ईश्वर की भक्ती करता था। एक दिन वह किसी कामसे अपने घर से बाहर गया था। उसे रस्ते पर १००० रुपये गिरे हुए मिले। फिर वह सोचने लगा की, "इन रुपयोंका क्या खरीदू?"
सबेरे से लेकर शामतक उसका पूरा समय इसीमे गया और उसका रोजका ईश्वर भक्ती काम उसने किया नहीं।
शाम के समय जब उसने दिए लगाये तब उसे खयाल आया, "अरे आज तो मैंने उपरवाले सबके मालिक को तो याद ही नहीं किया!"
तब उस फकीरने उन १००० रुपयोंको फेक दिया। और ईश्वरसे कहा, "ऐ मालिक, हे करुणानिधान, मैंने सारा दिन ये सोचनेमे लगा दिया की इन १००० रुपयोंसे क्या खरीदू और तुझको भुला दिया। जिनके पास लाखो करोडो है वो कैसे तुझको याद करते होंगे?"
इसी तरह हम इंसान भी अपना समय संपत्ती का आय और व्यय कैसे करे इसमेही समय बिता देते है और हमें जो भी सुख सुविधाये मिली है उनके लिए कम से कम भगवान का धन्यवाद भी अदा नहीं करते।
आजसे एक नियम जरूर ले की दिनभरमे जो भी अच्छा हुआ चाहे छोटा हो या बड़ा उसके लिए हम धन्यवाद देंगे उस उपरवालेका।
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