जय श्री राम सखियों और सखाओं। सुविचार संग्रह में आपका स्वागत है।
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तेजस्विता मन को विश्राम मुद्रा में रखती है और तन को सक्रीय रखती है|
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जिंदगी चट्टान की तरह ठोस नहीं, पानी की तरह तरल है|
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ज्यादातर पेड़ तानकर खड़ा होता है, सुकोमल लता उससे लिपटी रहती है, और जब आंधी आये तो लता उससे और भी जकड़कर लिपट जाती है|
४....
कम संग्रह करे पर जो हो वह महत्वपूर्ण हो|
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जितना हम असली फकीर को ढूंढेंगे, उतना ही हमारे अंदर अपग्रह का भाव मजबूत होगा और हम अशांति से दूर रहेंगे|
६....
अनचाहे काम करने वाले को भगवान की कृपा इसलिए समझ नहीं आती क्युकी उसके आत्मा में भगवान द्वारा की गई भलाई का भान नहीं होता|
७....
अशांति समय, उर्जा और सम्बन्ध तीनो को नष्ट करती है तथा शांति इन तीनो को मजबूत करती हैं क्युकी प्रकृति का मूल स्वाभाव ही शांत रहना है|
८....
सत्संग करते करते विचार जागेगा, मन में करुणा जागेगी| सत्संग आपको दुनिया में रहते रहते उलझने नहीं देगा| साधक को जब भी, जिस क्षण भी परमात्मा के प्रति भावोदय होगा जीवन धन्य हो जायेगा| यह क्षण तभी उपस्थित होता है जब आपका मन संवेदनशील होगा|
- शंकराचार्य
१०....
तेजस्विता आयु में नहीं, वृत्ति और स्वाभाव होती है|
- रविशंकरजि रावतपूरा सरकार
अन्ततक पढ़ने के लिए धन्यवाद। कृपया ब्लॉग को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
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