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Thursday, 23 April 2020

हास्य कविता


मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,
तुम एम.ए. फर्स्ट डिवीजन हो, मैं हुआ मैट्रिक फेल प्रिये,
तुम फौजी अफसर की बेटी, मैं तो किसान का बेटा हूँ,
तुम रबड़ी खीर मलाई हो, मैं तो सत्तू सपरेटा हूँ,
तुम ए.सी. घर में रहती हो, मैं पेड़ के नीचे लेटा हूँ,
तुम नई मारूति लगती हो मैं स्कूटर लेम्ब्रेटा हूँ,
इस तरह अगर हम छुप छुप, कर आपस में प्यार बढाएंगे,
तो एक रोज़ तेरे डैडी अमरीश पुरी बन जाएंगे,
सब हड्डी पसली तोड़, मुझे भिजवा देंगे वो जेल प्रिये,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,
तुम अरब देश की घोड़ी हो, मैं हूँ गदहे की नाल प्रिये,
तुम दीवाली का बोनस हो, मैं भूखों की हड़ताल प्रिये,
तुम हीरे जड़ी तश्तरी हो, मैं एल्युमिनियम का थाल प्रिये,
तुम चिकन, सूप, बिरयानी हो, मैं कंकड़ वाली दाल प्रिये,
तुम हिरन चौकड़ी भरती हो, मैं हूँ कछुए की चाल प्रिये,
तुम चन्दन वन की लकड़ी हो, मैं हूँ बबूल की छाल प्रिये,
मैं पके आम सा लटका हूँ, मत मारो मुझे गुलेल प्रिये,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,
तुम निर्मल पावन गंगा हो, मैं जलता हुआ पतंगा हूँ,
तुम राजघाट का शान्ति मार्च, मैं हिन्दू-मुस्लिम दंगा हूँ,
तुम हो पूनम का ताजमहल, मैं काली गुफा अजन्ता की,
तुम हो वरदान विधाता का, मैं गलती हूँ भगवन्ता की,
तुम जेट विमान की शोभा हो, मैं बस की ठेलमपेल प्रिये,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,
तुम नई विदेशी मिक्सी हो, मैं पत्थर का सिलबट्टा हूँ,
तुम ए.के. सैंतालिस जैसी, मैं तो इक देसी कट्टा हूँ,
तुम चतुर राबड़ी देवी सी, मैं भोला-भाला लालू हूँ,
तुम मुक्त शेरनी जंगल की, मैं चिड़ियाघर का भालू हूँ,
तुम व्यस्त सोनिया गाँधी सी, मैं अडवाणी सा खाली हूँ,
तुम हँसी माधुरी दीक्षित की, मैं पुलिसमैन की गाली हूँ,
गर जेल मुझे हो जाए तो, दिलवा देना तुम बेल प्रिये,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,
मैं ढाबे के ढांचे जैसा, तुम पाँच सितारा होटल हो ,
तुम चित्रहार का मधुर गीत, मैं कृषि दर्शन की झाड़ी हूँ,
तुम विश्व सुंदरी सी महान, मैं ठेलिया छाप कबाड़ी हूँ,
तुम सोनी का मोबाइल हो, मैं टेलीफोन वाला चोंगा,
तुम मछली मानसरोवर की, मैं सागर तट का हूँ घोंघा,
दस मंजिल से गिर जाऊँगा, मत आगे मुझे ढकेल प्रिये,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,
तुम जयाप्रदा की साड़ी हो, मैं शेखर वाली दाढी हूँ,
तुम सुषमा जैसी विदुषी हो, मैं लल्लू लाल अनाड़ी हूँ,
तुम जया जेटली सी कोमल, मैं सिंह मुलायम सा कठोर,
तुम हेमा मालिनी सी सुन्दर, मैं बंगारू की तरह बोर,
तुम सत्ता की महारानी हो, मैं विपक्ष की लाचारी हूँ,
तुम हो ममता जयललिता सी, मैं क्वाँरा अटल बिहारी हूँ,
तुम संसद की सुन्दरता हो, मैं हूँ तिहाड़ की जेल प्रिये,
मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नहीं है खेल प्रिये ।
वाकई बहुत ही मुश्किल है, अपना मेल प्रिये

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