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Sunday, 19 April 2020

सूर्य दर्शन


सूर्य दर्शन -
रोजाना कुछ समय सूर्य की और देखने के अनेक लाभ है
संध्या वंदन और सूर्य को अर्घ्य देने के कारण हम जल चढाते हुए कुछ समय सूर्य को देखते रहते है. संध्या वंदन में दोपहर में भी सूर्य को देखने का नियम है; पर यह दर्शन दोनों हाथों से एक मुद्रा बना कर उसमे से किया जाता है ताकि ज़्यादा रौशनी से आँखों पर बुरा असर ना हो.
कहा जाता है की जिस तरह पेड़ पौधों में क्लोरोफिल सूर्य प्रकाश से क्रियाशील हो कर भोजन निर्माण करता है , उसी तरह मनुष्य की आँखों में एक तत्व होता है जो सूर्य प्रकाश से क्रियाशील हो कर ऊर्जा का निर्माण करता है और शरीर को आरोग्य प्रदान करता है.
रोज़ सूर्य दर्शन करने से अवसाद , होरमोन , आँखों के रोग आदि ठीक होते है.
सूर्योदय के एक घंटे बाद तक और सूर्यास्त से एक घंटे पहले तक का समय सूर्य दर्शन के लिए सुरक्षित होता है ।
सबसे पहले अपने पैरों से चप्पल आदि निकाल कर मिटटी पर खड़े हो जाए और दस सेकण्ड तक लगातार सूर्य की और देखें. फिर आँखों को हाथों से ढक ले ।
रोज़ इसमें दस सेकण्ड की वृद्धि करते जाए.
ऐसा अधिकतम 45 मि. तक किया जा सकता है. यह समय धीरे धीरे नौ महीनों में पहुंचा जा सकता है.
एक महीने में 5 मि का समय हो जाएगा , यह आँखों के लिए लाभदायक है. चश्मे छुट जाते है.
मानसिक क्षमता बढाने के लिए 3 महीनो में १५ मि तक पहुँच कर फिर रोजाना 5 मि सूर्य दर्शन करे.
शारीरिक क्षमता के लिए 30 मि तक पहुँच कर फिर धीरे धीरे समय कम करते हुए रोजाना दस मि तक सूर्य दर्शन कर लाभ बनाए रखे.
आध्यात्मिक लाभ के लिए नौ महीनों में 45 मि तक पहुँच कर फिर धीरे धीरे समय कम कर के रोजाना १५ मि तक सूर्य दर्शन करे.
समय दस सेकण्ड रोज़ बढाते जाए. एक ही दिन में समय अधिक बढ़ाना सही नहीं है.
साथ ही सूर्य की रौशनीय में रखा हुआ पानी पियें.
साथ ही थोड़े समय नंगे पैर ज़मीन पर चलें |

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