जय हो बरसाने वाली
श्री राधे राधे जी
श्री राधे राधे जी
मृदुल भाषिणी राधा ! राधा !!
सौंदर्य राषिणी राधा ! राधा !!
सौंदर्य राषिणी राधा ! राधा !!
परम् पुनीता राधा ! राधा !!
नित्य नवनीता राधा ! राधा !!
नित्य नवनीता राधा ! राधा !!
रास विलासिनी राधा ! राधा !!
दिव्य सुवासिनी राधा ! राधा !!
दिव्य सुवासिनी राधा ! राधा !!
नवल किशोरी राधा ! राधा !!
अति ही भोरी राधा ! राधा !!
अति ही भोरी राधा ! राधा !!
कंचनवर्णी राधा ! राधा !!
नित्य सुखकरणी राधा ! राधा !!
नित्य सुखकरणी राधा ! राधा !!
सुभग भामिनी राधा ! राधा !!
जगत स्वामिनी राधा ! राधा !!
जगत स्वामिनी राधा ! राधा !!
कृष्ण आनन्दिनी राधा ! राधा !!
आनंद कन्दिनी राधा ! राधा !!
आनंद कन्दिनी राधा ! राधा !!
प्रेम मूर्ति राधा ! राधा !!
रस आपूर्ति राधा ! राधा !!
रस आपूर्ति राधा ! राधा !!
नवल ब्रजेश्वरी राधा ! राधा !!
नित्य रासेश्वरी राधा ! राधा !!
नित्य रासेश्वरी राधा ! राधा !!
कोमल अंगिनी राधा ! राधा !!
कृष्ण संगिनी राधा ! राधा !!
कृष्ण संगिनी राधा ! राधा !!
कृपा वर्षिणी राधा ! राधा !!
परम् हर्षिणी राधा ! राधा !!
परम् हर्षिणी राधा ! राधा !!
सिंधु स्वरूपा राधा ! राधा !!
परम् अनूपा राधा ! राधा !!
परम् अनूपा राधा ! राधा !!
परम् हितकारी राधा ! राधा !!
कृष्ण सुखकारी राधा ! राधा !!
कृष्ण सुखकारी राधा ! राधा !!
निकुंज स्वामिनी राधा ! राधा !!
नवल भामिनी राधा ! राधा !!
नवल भामिनी राधा ! राधा !!
रास रासेश्वरी राधा ! राधा !!
स्वयम् परमेश्वरी राधा ! राधा !!
स्वयम् परमेश्वरी राधा ! राधा !!
सकल गुणीता राधा ! राधा !!
रसिकिनी पुनीता राधा ! राधा !!
रसिकिनी पुनीता राधा ! राधा !!
कर जोरि वन्दन करूँ मैं
नित नित करूँ प्रणाम
रसना से गाती रहूँ
.राधा राधा नाम.
॥श्रीकृष्ण शरणम् मम ॥
नित नित करूँ प्रणाम
रसना से गाती रहूँ
.राधा राधा नाम.
॥श्रीकृष्ण शरणम् मम ॥
....जय श्री कृष्ण.....
उधो तुम भये भोरे पाती ले के आये दोड़े,
योग कहाँ राखें यहाँ रोम रोम श्याम है॥
योग कहाँ राखें यहाँ रोम रोम श्याम है॥
फिर गोपी कहने लगी:–
हम सच कहती है
एक बार जिसे कृष्ण का चसका लग जाता है वह उसे छोड नहीं सकता.
हमारा तो जीवन प्राण आधार है वो,
हमें और किसी से क्या लेना- देना.
एक बार जिसे कृष्ण का चसका लग जाता है वह उसे छोड नहीं सकता.
हमारा तो जीवन प्राण आधार है वो,
हमें और किसी से क्या लेना- देना.
हमारी वाणी नित्य-निरन्तर उन्हीं के नामों का उच्चारण करती रहे
और शरीर उन्हीं को प्रणाम करने,
उन्हीं के आज्ञा-पालन और सेवा में लगा रहे।
और शरीर उन्हीं को प्रणाम करने,
उन्हीं के आज्ञा-पालन और सेवा में लगा रहे।
उद्धवजी! हम सच कहते हैं,
हमें मोक्ष की इच्छा बिल्कुल नहीं है।
हम भगवान् की इच्छा से अपने कर्मों के अनुसार चाहे जिस योनि में जन्म लें वहां शुभ आचरण करें,
दान करें
और उसका बस फल यही पावें कि हमारे अपने ईश्वर श्रीकृष्ण में हमारी प्रीति उत्तरोत्तर बढाती है।
....जय श्री कृष्ण.....
हमें मोक्ष की इच्छा बिल्कुल नहीं है।
हम भगवान् की इच्छा से अपने कर्मों के अनुसार चाहे जिस योनि में जन्म लें वहां शुभ आचरण करें,
दान करें
और उसका बस फल यही पावें कि हमारे अपने ईश्वर श्रीकृष्ण में हमारी प्रीति उत्तरोत्तर बढाती है।
....जय श्री कृष्ण.....
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