तरक्की की फसल,व् हम भी "काट" लेते..!
थोड़े से तलवे, अगर "हम" भी चाट लेते..
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उम्र की राह पर रस्ते बदल जाते है,
वक़्त की आंधी मे इंसान बदल जाते है,
हम सोचते है आपको इतना याद ना करे,
लेकिन आँखे बंद करते ही इरादे बदल जाते है
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चंद सिक्कों में बिकता है यहाँ इंसान का ज़मीर;
कौन कहता है मेरे मुल्क में महंगाई बहुत है।
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पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है.
अभी तो आए है जमीं पर . आसमान की उडान अभी बाकी है.
अभी तो सुना है लोगो ने सिर्फ मेरा नाम.
अभी इस नाम कि पहचान बनाना बाकी है...
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जब हाथ आसमां तक नहीं पहुँचते...मैं पैर बुज़ुर्गों के छुं लेता हूं...
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ऐ कलम ज़रा रुक-रुक के चल
देख क्या गज़ब का मुकाम आया है
ज़रा ठहर जा कहीं उसे दर्द ना हो
तेरी नोक के नीचे उसका नाम आया है.
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तू छोड़ दे कोशिशें
इन्सानों को पहचानने की...!
यहाँ जरुरतों के हिसाब से
सब नकाब बदलते हैं...!
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एक पथ्थर सिर्फ एक बार मंदिर
जाता है और भगवान बन जाता है ..
इंसान हर रोज़ मंदिर जाते है फिर
भी पथ्थर ही रहते है ..!!
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एक औरत बेटे को जन्म देने के लिये
अपनी सुन्दरता त्याग देती है.......
और वही बेटा एक सुन्दर बीवी के लिए
अपनी माँ को त्याग देता है
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जीवन में हर जगह हम "जीत" चाहते हैं...
सिर्फ फूलवाले की दूकान ऐसी है
जहाँ हम कहते हैं कि "हार" चाहिए।
क्योंकि हम भगवान से "जीत" नहीं सकते।
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हम और हमारे ईश्वर, दोनों एक जैसे हैं।
जो रोज़ भूल जाते हैं...वो हमारी गलतियों को,
हम उसकी मेहरबानियों को।
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वक़्त का पता नहीं चलता अपनों के साथ.....
पर अपनों का पता चलता है, वक़्त के साथ...
वक़्त नहीं बदलता अपनों के साथ,
पर अपने ज़रूर बदल जाते हैं वक़्त के साथ...!!!
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ज़िन्दगी पल-पल ढलती है,
जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है...
शिकवे कितने भी हो हर पल,
फिर भी हँसते रहना...क्योंकि ये
ज़िन्दगी जैसी भी है,
बस एक ही बार मिलती है।
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