गर ठहर भी जाऊं तेरी इल्तेजा सुन कर !
मेरी होगी रात शुरू तेरी सहर होने के साथ !!
=====मेरी गजल को तलाश थी किसी वारिस की ,
कल रात दिल ने तेरे नाम की सिफारिश की.
=====तुम चाँद के साथ चले आओ, ये रात नूरानी हो जाये
कुछ तुम कह दो कुछ हम कह दें, और एक कहानी हो जाये
=====Image Credit: unsplash.com
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मौजूद थी उदासी अभी पिछली रात की
बहला था दिल जरा सा कि फिर से रात हो गई ..
=====वो एक रात जली तो उसे शम्मा कह दिया,
हम बरसों से जल रहे हैं कोई खिताब तो दो
======कहा लेकर जाऊ तुझे..
रात के अँधेरे में ए मेरे गम
में तनहा हूँ मेरे पास ही सोजा.
=====अगर तुम रात हो तो..
तो नही तलब मुझे सुबह होने की..
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तुम एक रात हो और मैं एक सुबह. ..
आओ ना दोनों मिलकर शाम हो जाए
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सभी के चेहरे में वो बात नहीं होती,
थोड़े से अँधेरे से रात नहीं होती,
जिंदगी में कुछ लोग बहुत प्यारे होते हैं,
क्या करें उन्ही से हमारी 'मुलाकात' नहीं होती.....
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रात भर जागते रहने का सिला है शायद....
तेरी तस्वीर-सी महताब में आ जाती है.....
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मैं रोता रहा रात भर मगर फैंसला ना कर सका,
की तू याद आ रही है या मैं याद कर रहा हूँ ..
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नींद थी जो रात भर, दूर खड़ी मुझे देखती रही;
कौन था जो रात भर, मेरी आँखों में जगता रहा!
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हर रात जान बूझकर रखता हूँ दरवाज़ा खुला,
शायद कोई लुटेरा मेरा गम भी लूट ले !!
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