कभी खुद से भी खुद को देख ले ऐ नारी।।।
तेरे होने से ही चलती है दुनिया ये सारी।
कभी खुद से भी खुद को पहचान ले ऐ नारी।
तू है तो है उजाला, वरना अंधियारी सी है ये दुनिया सारी।।
तू डरती रही तो वो डराते रहे,
तू झुकती रही तो लोग झुकाते रहे,
तू सहती रही तो लोग जुल्म ढाते रहे।
तू सत्य है, यूँ असत्य न बन।
तू जीवित है, तू मिट्टी ना बन।
लोग गिराएंगे, लोग तुझे डराएंगे।
पर तू, तू डरना मत, तू गिरना मत।।
तू आगे बढ़, तू हिम्मत दिखा।
तू बन ऐसी वीरांगना जो मरकर भी आज जीवित हैं।
तू बन रानी लक्षमीबाई तू बन रानी चेन्नमा,
तू बन रानी पद्मिनी तू बन जा वीरांगना झलकारी।
तू अब न रहना चुप अब ना है चुप रहने की बारी।
तू अब लड़ना उनसे जिन्होंने तेरी लाज उघारी,
तू बन जवाब उनका जिन्होंने उठाया था तुझ पर सवाल।
तू उठ खड़ी हो और बता इन्हें,
तू है तो है दुनिया ये सारी, तू है तो है दुनिया ये सारी।
–सभी मातृ-शक्ति को समर्पित-
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