को कोई ट्रेन डकैती कामों के एक अभियुक्त थे ठाकुर रेशम सी है। अन्य अभियुक्तों के साथ उन्हें भी मृत्युदंड मिला। ठाकुर रोशन सिंह देश भक्ति। उन्हें मौत की सजा सुनकर रंच मात्र भी चिंता या कष्ट नहीं हुआ उनके परिवार में पत्नी बच्चे सभी थे किंतु वह इन सबसे ऊपर देश को मानते थे इसलिए वे हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ गए उनकी मृत्यु के 2 वर्ष बाद उनकी पत्नी को अपने युवा बेटी की शादी की चिंता हुई। उन्होंने काफी प्रयास किए। अनेक लड़के देखे काफी प्रयास के बाद एक जगह बात पक्की हुई। लड़के वालों ने भी हां कर दी किंतु उस इलाके के दरोगा ने उन्हें जाकर धमकाया कि एक क्रांतिकारी की लड़की से शादी करना राजद्रोह समझा जाएगा और तुम सभी पर मुकदमा चलेगा सजा होगी। लड़के वाले भयभीत हो गए और रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया। जब एक अखबार के संपादक को यह बात पता चली तो वह 15 मील पैदल चलकर रेशम सी ह के गांव आया और दरोगे की खूब लानत मलामत की। आखिरकार दरोगे ने क्षमा मांगी और लड़की के विवाह का खर्च उठाने के लिए भी तैयार हो गया। कन्यादान के समय जब लड़की के पिता का प्रश्न उठा तो उसी संपादक ने आगे बढ़कर कहा कि रेशन सिह के ना होने पर मैं लड़की का पिता हूं। कन्यादान मैं करूंगा। सर्वोदय संपादक थे स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी। दरअसल सभी प्रकार के विवश लोगों की सहायता करना व्यक्तित्व की उदारता दर्शाता है। ऐसे लोग प्रणम्य व अनुकरणीय होते हैं।